नई दिल्ली । शुक्रवार, 3 जुलाई 2026
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) पर बच्चों की सुरक्षा और विज्ञापनों की समीक्षा प्रणाली को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इंस्टाग्राम के विज्ञापन नेटवर्क पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM – Child Sexual Abuse Material) को बढ़ावा देने वाले अकाउंट्स और संदिग्ध वेबसाइट्स का प्रचार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संवेदनशील मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (MeitY) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि इस गंभीर कोताही को लेकर इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी ‘मेटा’ (Meta) को तुरंत समन (तलब) किया जाए और इस लापरवाही पर जवाब-तलब किया जाए। सरकार का स्पष्ट कहना है कि भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला? (The Instagram CSAM Controversy)
यह पूरा मामला हाल ही में आई कुछ खोजी मीडिया रिपोर्ट्स के बाद उजागर हुआ। इन रिपोर्ट्स में चौंकाने वाला दावा किया गया कि इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसे पेड विज्ञापन (Paid Advertisements) एक्टिव थे, जो सीधे तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री (CSAM) का प्रचार कर रहे थे।
हैरान करने वाली बात यह है कि इन विज्ञापनों में कुछ ऐसे लिंक्स और कीवर्ड्स का इस्तेमाल किया गया था, जिन पर क्लिक करते ही यूजर्स मैसेजिंग ऐप ‘टेलीग्राम’ के चुनिंदा चैनलों तक पहुंच रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन टेलीग्राम चैनलों पर यह बेहद आपत्तिजनक और गैरकानूनी सामग्री महज ₹99 जैसी मामूली कीमतों पर बेची जा रही थी।
एल्गोरिदम और विज्ञापन समीक्षा प्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला इसलिए अधिक गंभीर हो जाता है क्योंकि इंस्टाग्राम पर कोई भी विज्ञापन तब तक लाइव नहीं हो सकता, जब तक कि वह मेटा के ऑटोमेटेड एआई फिल्टर्स और विज्ञापन समीक्षा प्रणाली (Ad Review System) द्वारा मंजूर न किया गया हो। ऐसे में इन विज्ञापनों का पास होना मेटा के सुरक्षा दावों और उनकी एआई मॉडरेशन तकनीक पर बड़े सवालिया निशान खड़े करता है।
केंद्र सरकार मेटा से पूछेगी ये तीखे सवाल
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) मेटा के आला अधिकारियों के सामने सुरक्षा से जुड़े कई कड़े सवाल रखने जा रहा है:
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सिस्टम फेलियर: मेटा का ऑटोमेटेड रिव्यू सिस्टम और सुरक्षात्मक फिल्टर्स ऐसे संवेदनशील और प्रतिबंधित कीवर्ड्स वाले विज्ञापनों को रोकने में पूरी तरह विफल कैसे रहे?
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मौजूदा सुरक्षा उपाय: इस तरह के विज्ञापनों को डिटेक्ट करने और उन्हें तुरंत ब्लॉक करने के लिए प्लेटफॉर्म पर उस समय क्या सुरक्षा उपाय (Safeguards) सक्रिय थे?
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भविष्य का एक्शन प्लान: आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कंपनी अपनी विज्ञापन समीक्षा नीति और एल्गोरिदम में क्या बदलाव करने जा रही है?
भारत का कानून क्या कहता है? (Legal Framework in India)
भारत में बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) को देखना, बनाना, उसका भंडारण करना या उसे किसी भी माध्यम से प्रसारित व प्रचारित करना एक अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। इस मामले में निम्नलिखित कड़े कानूनी प्रावधान लागू होते हैं:
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सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67 और 67B: इस कानून के तहत इंटरनेट या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बच्चों से जुड़ी अश्लील या यौन शोषण वाली सामग्री को बढ़ावा देने, वितरित करने या प्रसारित करने पर भारी जुर्माने के साथ 5 से 7 साल तक की जेल का सख्त प्रावधान है।
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आईटी नियम, 2021 (IT Rules 2021): इन नियमों के तहत इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Significant Social Media Intermediaries) की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखें। ऐसी किसी भी अवैध सामग्री की शिकायत मिलने या स्वतः संज्ञान में आने पर उन्हें इसे 24 से 36 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होता है।
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पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act): बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले इस कड़े कानून के तहत भी ऐसे अवैध नेटवर्क का संचालन करने वाले और उसमें सहयोग करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
आंकड़े बयां कर रहे हैं स्थिति की भयावहता
ऑनलाइन स्पेस में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारत पहले से ही बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है। उपलब्ध साइबर डेटा के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) को लेकर करीब 19 लाख साइबरटिपलाइन (Cybertipline) शिकायतें दर्ज की गई थीं। इन डरावने आंकड़ों के साथ इस मामले में अमेरिका के बाद भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर रहा है। यही वजह है कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मनमानी और ढुलमुल रवैये को लेकर अब कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
आगे की राह और निष्कर्ष
हाल के महीनों में केंद्र सरकार ऑनलाइन सुरक्षा, डीपफेक और आपत्तिजनक विज्ञापनों को लेकर टेक कंपनियों पर लगातार नकेल कस रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मेटा सरकार के समन का क्या जवाब देती है और अपने विज्ञापन नेटवर्क को सुरक्षित व स्वच्छ बनाने के लिए किन जमीनी सुधारों की घोषणा करती है। डिजिटल युग में टेक दिग्गजों को यह समझना होगा कि मुनाफे (Revenue) से कहीं अधिक महत्वपूर्ण यूजर्स (विशेषकर बच्चों) की सुरक्षा है।
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