लोड हो रहा है...

धर्मांतरण से बचकर राजस्थान आये हजारों लोगों को सीएए का इंतजार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जयपुर. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर भारत आ रहे हिन्दूओं को नागरिकता देने के लिए केंद्र सरकार लोकसभा चुनावों से पहले ही नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करवाना चाहती है। गृह मंत्री अमित शाह इसे लेकर पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले सीएए लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

राजस्थान में रह रहे हैं 30 हजार से ज्यादा शरणार्थी

राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में रह रहे करीब 30 हजार से ज्यादा लोग सीएए की अधिसूचना का इंतजार कर रहे हैं। ये वे लोग हैं जो पाकिस्तान से राजस्थान के विभिन्न जिलों में आकर शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं और बरसों से भारत की नागरिकता का इंतजार कर रहे हैं। पाकिस्तान की सीमा से सटे जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर में पाकिस्तान से पलायन करके आए हिंदू बड़ी संख्या में रहते हैं। अकेले जोधपुर में 18 हजार रजिस्टर्ड पाकिस्तानी हिंदू रह रहे हैं, जो कई वर्षों से भारत की नागरिकता का इंतजार कर रहे हैं।

पाकिस्तान में होने वाले उत्पीड़न से परेशान हो कर लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत आए ये लोग अब भारत की नागरिकता का इंतजार कर रहे हैं। सामान्यत: इन्हें नागरिकता मिलने में पांच से दस साल और कई बार तो इससे भी ज्यादा समय लग जाता है, क्योंकि प्रक्रिया लंबी है और इसमें इंटेलीजेंस रिपोर्ट सहित कई तरह की औपचारिकताएं भी शामिल हैं। सीमावर्ती जिलों में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की नागरिकता के लिए लंबे समय से काम कर रहे सीमांत लोक संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढ़ा का कहना है कि सीएए के लागू होने से हमारी बहुत सी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। सोढ़ा का कहना है कि हम अपनी ओर से प्रक्रिया को सरल बनाने के कई सुझाव सरकार को दे चुके हैं, अब देखना यही है कि सरकार क्या नियम और उपनियम लेकर आती है, क्योंकि कानून तो बनने के बाद नियमों की जटिलता के कारण इन्हें लागू करना मुश्किल हो जाता है।

पूरे दस्तावेजों के साथ मौजूद हैं ज्यादातर शरणार्थी 

राजस्थान में आए हिंदू शरणार्थियो में से ज्यादातर ऐसे हैं, जिनके पास दस्तावेज पूरे हैं और सीएए लागू होने के बाद उन्हें नागरिकता मिलने में ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। हिंदू सिंह सोढ़ा का कहना है कि ज्यादातर लोगों के पास पूरे दस्तावेज हैं, लेकिन जिनके पास नहीं हैं, उनके बारे में भी हमने सरकार को सुझाव दिए हुए हैं और उम्मीद है कि सरकार उन पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि कानून लागू होने के बाद सरकार को विशेष शिविर लगाकर नागरिकता देनी चाहिए ताकि यह काम जल्द से जल्द पूरा हो सके।

- Advertisement -

साभार : अमर उजाला

भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

https://www।amazon.in/dp/9392581181/

https://www।flipkart.com/bharat-1857-se-1957-itihas-par-ek-drishti/p/itmcae8defbfefaf?pid=9789392581182

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।