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भारतीय तटरक्षक के डीजी राकेश पाल की हार्ट अटैक से मौत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चेन्नई. भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के महानिदेशक राकेश पाल का रविवार (18 अगस्त) को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. ये घटना तब हुई जब आईएनएस अड्यार में उन्हें सीने में दर्द हुआ, उस दौरान वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चेन्नई यात्रा की तैयारियों के बारे में अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे. तभी उन्हें बेचैनी महसूस होने पर चेन्नई के राजीव गांधी सरकारी अस्पताल ले जाया गया. जहां उन्हें तुरंत उपचार दिया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.

भारतीय तटरक्षक बल के प्रमुख राकेश पाल का चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. बेचैनी महसूस होने पर उन्हें करीब 2.30 बजे शहर के राजीव गांधी सरकारी अस्पताल ले जाया गया लेकिन शाम करीब 7 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी राजीव गांधी सरकारी अस्पताल पहुंचे और राकेश पाल को श्रद्धांजलि दी. उनका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया जाएगा.

कौन थे राकेश पाल?

कोस्ट गार्ड के डीजी राकेश पाल को पिछले साल जुलाई में भारतीय तटरक्षक बल के 25वें महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था. भारतीय नौसेना अकादमी के पूर्व छात्र राकेश पाल जनवरी 1989 में भारतीय तटरक्षक बल में शामिल हुए थे. उन्होंने अपने 35 साल से ज्यादा के करियर में फ्लैग ऑफिसर ने कई महत्वपूर्ण पद संभाले, जिनमें कमांडर तटरक्षक क्षेत्र (उत्तर पश्चिम), गांधीनगर, उप महानिदेशक (नीति और योजना) और तटरक्षक मुख्यालय, नई दिल्ली में अतिरिक्त महानिदेशक तटरक्षक शामिल हैं.

जानिए DG राकेश पाल ने किन महत्वपूर्ण पदों पर किया काम?

वहीं, डीजी राकेश पाल के पास काफी समुद्री अनुभव है और उन्होंने आईसीजी जहाजों की सभी श्रेणियों की कमान संभाली है, जिसमें आईसीजीएस समर्थ, आईसीजीएस विजित, आईसीजीएस सुचेता कृपलानी, आईसीजीएस अहिल्याबाई और आईसीजीएस सी-03 शामिल है. इसके अलावा राकेश पाल ने गुजरात में अग्रिम क्षेत्र के दो तटरक्षक ठिकानों – ओखा और वडिनार की भी कमान संभाली है. डीजी राकेश पाल को उनकी शानदार सेवा के लिए साल 2013 में तटरक्षक पदक और साल 2018 में राष्ट्रपति तटरक्षक पदक से सम्मानित किया गया था.

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साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।