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फर्जी लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने 4 लोगों को किया गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पटना. बिहार के वैशाली शहरी विकास कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में 85 करोड़ रुपये के बड़े लोन फ्रॉड का मामला सामने आया है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस घोटाले की जांच करते हुए 4 लोगों को गिरफ्तार किया है. मामले में आरजेडी नेता आलोक कुमार मेहता का नाम भी सामने आ रहा है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है. ईडी की हालिया छापेमारी ने इस घोटाले के बड़े नेटवर्क और फर्जीवाड़े की गहरी जड़ें उजागर की हैं.

फर्जी लोन खातों का जाल

जानकारी के अनुसार यह धोखाधड़ी लगभग 400 फर्जी लोन खातों के माध्यम से की गई. इन खातों का उपयोग नकली और जाली वेयरहाउस तथा एलआईसी रसीदों के आधार पर पैसे बांटने के लिए किया गया. जांच के दौरान यह पाया गया कि बैंक के कर्मचारियों और अन्य निजी व्यक्तियों ने इस फर्जीवाड़े में सक्रिय भूमिका निभाई. ये लोग आरजेडी नेता आलोक कुमार मेहता और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे.

ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाई

ईडी ने इस मामले की तह तक जाने के लिए बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के 18 स्थानों पर छापेमारी की. इन छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, नकदी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस घोटाले में शामिल लोगों ने अवैध संपत्ति अर्जित की है, जिसे जब्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

राजनीतिक संगठनों पर सवाल

आरजेडी नेता आलोक कुमार मेहता का नाम इस घोटाले से जुड़ने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर आरजेडी पर निशाना साधा है, जबकि आरजेडी ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है. आलोक कुमार मेहता ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे.

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बैंक और ग्राहक दोनों प्रभावित

साथ ही इस बड़े फर्जीवाड़े का असर न केवल बैंक पर पड़ा है, बल्कि इसके ग्राहकों पर भी गहरा असर हुआ है. कई खाताधारकों ने अपनी जमा राशि को लेकर चिंता जताई है. ईडी ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और बैंक की स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

अभी क्या होगा आगे?

ईडी की जांच जारी है और इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं. सवाल यह है कि क्या इस घोटाले का राजनीतिक और वित्तीय प्रभाव वैशाली शहरी विकास कोऑपरेटिव बैंक को उबारने में मदद करेगा या यह घोटाला और गहराएगा.

साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।