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एसजीपीसी ने की पंजाब में कंगना रनौत की फिल्म ‘इमरजेंसी’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चंडीगढ़. एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी को पंजाब में बैन करने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को चिट्ठी लिखी है. गुरुवार (16 जनवरी 2025) को लिखी चिट्ठी में हरजिंदर सिंह धामी ने कहा है कि शुक्रवार को रिलीज होने वाली फिल्म ‘इमरजेंसी’ में सिखों को गलत तरीके से पेश किया गया है. फिल्म ‘इमरजेंसी’ सिखों के खिलाफ दुष्प्रचार करेगी, इसलिए इसे पंजाब में नहीं चलने दिया जाना चाहिए.

एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने आगे लिखा है कि अगर फिल्म ‘इमरजेंसी’ पंजाब में चलती है तो इसका विरोध होगा. एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने सीएम भगवंत मान को लिखी चिट्ठी में कहा है कि शुक्रवार को रिलीज होने वाली फिल्म में सिखों को गलत तरीके से पेश किया गया है. हरजिंदर सिंह धामी सीएम मान को लिखे पत्र में बताया है कि बीजेपी कंगना रनौत द्वारा निर्मित फिल्म इमरजेंसी 17 जनवरी 2025 को पंजाब के विभिन्न शहरों के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और इसके लिए टिकटें भी बुक होनी शुरू हो गई हैं.

फिल्म रिलीज होने पर बढ़ेगी नाराजगी

उन्होंने इस फिल्म को लेकर अपना विरोध जताते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पहले ही पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा है. उन्होंने एक प्रस्ताव के माध्यम से राज्य सरकार से मांग की है कि वह पंजाब में इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगाए, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है. यदि यह फिल्म 17 जनवरी 2025 को रिलीज होती है तो स्वाभाविक रूप से सिख जगत में आक्रोश और गुस्सा पैदा होगा.

उन्होंने कहा ​है कि फिल्म में 1984 में सिखों के पवित्र धार्मिक स्थलों सचखंड श्री हरमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब और कई अन्य धार्मिक स्थलों पर हुए घातक हमलों के साथ-साथ सिख नरसंहार और जनसंहार के दमन को भी दर्शाया गया है. सिख विरोधी एजेंडे के तहत किए जा रहे कामों के खिलाफ जहर उगलना. नीचे की भावना वीर शिक्षा है. हिम से ताल वी हिलाब हिंस सिंधी से बेभी सी मद नौरल सिंथ अस्मा भिंडरावाले का भी चरित्र हनन किया गया है.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।