शनिवार, सितंबर 19 2026 | 10:42:07 PM

छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर एसएफआई ने किया पश्चिम बंगाल के शिक्षा मत्री का घेराव

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. कोलकाता का जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) छात्र संघ के चुनाव की मांग पर शनिवार को रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। चुनाव की मांग कर रहे वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के छात्रों ने शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु व उनकी काफिले की गाड़ियों को रोक दिया, टायरों से हवा निकाल दी और उनमें तोडफ़ोड़ की।

वहीं, शिक्षा मंत्री ने जब गाड़ी से उतरकर उनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने ‘चोर-चोर’ और ‘वापस जाओ’ के नारे लगाए गए और उनके साथ धक्का-मुक्की की। इसमें ब्रात्य बसु को चोटें आई हैं। शिक्षा मंत्री जेयू के तृणमूल पंथी प्रोफेसरों के संगठन वेबकूपा की बैठक में शामिल होने आए थे। बैठक के बाद जेयू परिसर से निकलते वक्त यह घटना घटी। इसके बाद एसएफआई व वेबकूपा के सदस्य आपस में भिड़ गए, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए हैं।

प्रोफेसर व वेबकूपा के सदस्य ओमप्रकाश मिश्रा को वामपंथी छात्रों ने लाठियों लेकर दौड़ाया। प्रदर्शनकारी छात्रों पर एक महिला प्रोफेसर की साड़ी फाड़ने का भी आरोप लगा है। एसएफआई ने शिक्षा मंत्री पर अपनी गाड़ी से छात्रों को कुचलने का आरोप लगाया है।

छात्र हड़ताल का आह्वान

शिक्षा मंत्री जेयू परिसर से निकलकर सीधे एसएसकेएम अस्पताल के ट्रामा केयर सेंटर गए और वहां अपनी जांच कराई। एसएफआई ने घटना के विरोध में सोमवार को छात्र हड़ताल बुलाई है। उन्होंने जादवपुर थाने के सामने प्रदर्शन भी किया। दूसरी तरफ तृणमूल ने जादवपुर से सांसद सायोनी घोष व राज्य के खेल मंत्री अरूप बिश्वास के नेतृत्व में प्रतिवाद जुलूस निकाला। तृणमूल नेता कुणाल घोष ने कहा कि जेयू में शिक्षा मंत्री पर जानलेवा हमला किया गया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि तृणमूल की सहनशीलता को उसकी कमजोरी न समझा जाए।

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साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।