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प्रताप बाजवा ने किया घर में 50 बम होने का दावा, पंजाब पुलिस ने की पूछताछ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चंडीगढ़. पंजाब में अक्सर सियासी तकरार देखी जाती है. एक बार फिर आप और कांग्रेस आमने- सामने आ गई है. पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा के एक बयान ने राज्य में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. बाजवा ने दावा किया कि पंजाब में 50 बम आए हैं, जिनमें से 18 फट चुके हैं और 32 अभी बाकी हैं. उनके इस बयान के बाद पंजाब पुलिस ने रविवार को उनके चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-8 आवास पर पहुंचकर उनसे पूछताछ की. वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाजवा के बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए उन पर जमकर निशाना साधा और सवाल उठाए.

सीएम मान ने कही ये बात

पंजाबी में रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश में मान ने बाजवा पर दहशत फैलाने तक का आरोप लगाया. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाजवा के दावे को लेकर कहा, “प्रताप सिंह बाजवा पंजाब में 50 बम होने की बात कर रहे हैं. प्रताप सिंह बाजवा और कांग्रेस पार्टी के नेता इस बात की पुष्टि करें कि पंजाब में बम कहां रखे गए हैं. अन्यथा पुलिस को आदेश दिए जाएंगे कि झूठी सूचना देने और दहशत फैलाने के आरोप में प्रताप बाजवा के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

क्या है कनेक्शन?

उन्होंने आगे कहा, “अगर विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब में बम होने की जानकारी दी है तो उनका पाकिस्तान से क्या कनेक्शन है कि वहां के आतंकवादी सीधे उन्हें फोन करके बता रहे हैं कि उन्होंने कितने बम भेजे हैं? यह जानकारी न तो इंटेलिजेंस के पास है और न ही केंद्र सरकार की तरफ से आई है, लेकिन अगर विपक्ष के इतने बड़े नेता के पास यह जानकारी आई है तो उनकी जिम्मेदारी थी कि वे पंजाब पुलिस को बताते कि यहां बम हैं.

पुलिस ने की पूछताछ

क्या वे बम फटने और लोगों के मरने का इंतजार कर रहे थे ताकि उनकी राजनीति चलती रहे? और अगर यह झूठ है तो क्या वे ऐसी बातें करके पंजाब में आतंक फैलाना चाहते हैं? पंजाब पुलिस ने प्रताप सिंह बाजवा के बयान को गंभीरता से लेते हुए उनके आवास पर पहुंचकर उनसे पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने बाजवा से उनके दावे का आधार और सूचना के स्रोत के बारे में जानकारी मांगी. हालांकि, बाजवा ने इस मामले में अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है.

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साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।