मंगलवार, मार्च 10 2026 | 12:23:45 PM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / ईरान में महंगाई की आग: प्रदर्शनों में 35 की मौत, 1200 से अधिक हिरासत में

ईरान में महंगाई की आग: प्रदर्शनों में 35 की मौत, 1200 से अधिक हिरासत में

Follow us on:

तेहरान. ईरान में गिरती अर्थव्यवस्था और आसमान छूती महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ जनआक्रोश अब एक बड़े विद्रोह में बदल गया है। पिछले एक सप्ताह से जारी इन हिंसक प्रदर्शनों में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें चार बच्चे और सुरक्षा बलों के दो सदस्य भी शामिल हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 1,200 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।

प्रमुख बिंदु: संकट की स्थिति

  • मौतें: कम से कम 35 लोगों की जान गई (29 प्रदर्शनकारी, 4 बच्चे, 2 सुरक्षाकर्मी)।

  • गिरफ्तारियां: 1,200 से अधिक लोग जेलों में बंद, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र और व्यापारी शामिल हैं।

  • विस्तार: विरोध प्रदर्शन ईरान के 31 में से 27 प्रांतों के लगभग 250 स्थानों तक फैल चुका है।

  • घायल: सुरक्षा बलों के लगभग 250 पुलिसकर्मी और 45 ‘बसीज’ (Basij) वालंटियर्स घायल हुए हैं।

विरोध की मुख्य वजह: मुद्रा का पतन और महंगाई

दिसंबर 2025 के अंत में ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ की वैल्यू में ऐतिहासिक गिरावट आई। खुले बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 14 लाख रियाल तक पहुंच गई, जिससे खाने-पीने की चीजों और दवाइयों के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गए।

  • सांख्यिकी केंद्र के अनुसार, दिसंबर में महंगाई दर 42.2% दर्ज की गई।

  • खाद्य पदार्थों की कीमतों में 72% तक का भारी इजाफा देखा गया है।

बाजार से लेकर यूनिवर्सिटी तक उबाल

प्रदर्शनों की शुरुआत तेहरान के ऐतिहासिक ‘ग्रैंड बाजार’ से हुई, जहाँ व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर आर्थिक नीतियों का विरोध किया। देखते ही देखते यह आंदोलन छात्रों और युवाओं (Gen-Z) के बीच फैल गया। प्रदर्शनकारी अब केवल आर्थिक सुधार ही नहीं, बल्कि “मुल्लाओं को देश छोड़ना होगा” और “आजादी” जैसे राजनीतिक नारों के साथ मौजूदा शासन को चुनौती दे रहे हैं।

सरकार का रुख और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को ‘दंगा’ करार दिया है और सुरक्षा बलों को सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए ईरानी शासन को चेतावनी दी है, जबकि भारत सरकार ने भी वहां रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी है।

तेहरान: सत्ता के केंद्र में संग्राम

  • ग्रैंड बाजार: तेहरान का ऐतिहासिक बाजार इस आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। व्यापारियों की हड़ताल ने अर्थव्यवस्था को ठप कर दिया है। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद, बाजार के आसपास ‘रियाल’ की गिरती कीमत को लेकर लगातार नारेबाजी हो रही है।

  • तेहरान विश्वविद्यालय: यहाँ छात्र बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा बलों ने कैंपस की घेराबंदी कर रखी है और रिपोर्टों के अनुसार, दर्जनों छात्र नेताओं को उनके हॉस्टल से उठाकर अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है।

कुर्दिस्तान और पश्चिमी प्रांत (सीमावर्ती क्षेत्र)

  • ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत (जैसे सनंदाज और महबाद) में स्थिति सबसे गंभीर है। यहाँ सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच ‘अर्बन वारफेयर’ (शहरी युद्ध) जैसी स्थिति देखी जा रही है।

  • इन क्षेत्रों में इंटरनेट पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि यहाँ रात के अंधेरे में भारी सैन्य वाहनों का उपयोग किया जा रहा है।

मशहद और इस्फहान: औद्योगिक और धार्मिक केंद्र

  • मशहद: यह ईरान का एक महत्वपूर्ण धार्मिक शहर है, जहाँ से इस बार भी आर्थिक असंतोष की आवाजें उठी हैं। यहाँ मध्यम वर्ग के लोग पेंशन और बचत डूबने के विरोध में सड़कों पर हैं।

  • इस्फहान: यहाँ के स्टील वर्कर और किसान पानी की कमी और महंगाई को लेकर एक साथ विरोध कर रहे हैं। यहाँ पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के साथ-साथ ‘पैलेट गन्स’ का भी इस्तेमाल किया है।

सिस्तान-बलूचिस्तान: दक्षिणी-पूर्वी अशांति

  • जाहेदान जैसे शहरों में शुक्रवार की नमाज के बाद बड़े विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। यहाँ आर्थिक उपेक्षा और महंगाई के साथ-साथ भेदभाव के आरोप भी प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं।

सुरक्षा बलों की रणनीति और दमन

ईरानी सरकार ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई है:

  1. डिजिटल घेराबंदी: इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसी सेवाओं को ब्लॉक कर दिया गया है ताकि लोग संगठित न हो सकें।

  2. सामूहिक गिरफ्तारियां: केवल प्रदर्शनकारियों ही नहीं, बल्कि मानवाधिकार वकीलों और पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है ताकि सूचनाओं का बाहर आना रुक सके।

  3. अर्धसैनिक बल (Basij): सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अपने ‘बसीज’ लड़ाकों को तैनात किया है, जो सादे कपड़ों में भीड़ में घुसकर हिंसा और गिरफ्तारियां कर रहे हैं।

भारत-ईरान संबंधों पर पड़ने वाले असर

चाबहार बंदरगाह परियोजना पर अनिश्चितता

भारत के लिए चाबहार बंदरगाह मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुँचने का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग है।

  • प्रभाव: ईरान में आंतरिक अशांति और आर्थिक बदहाली के कारण इस परियोजना के विस्तार और संचालन में देरी हो सकती है। यदि ईरान की सरकार प्रदर्शनों को दबाने में उलझी रहती है, तो प्रशासनिक और लॉजिस्टिक स्तर पर बाधाएं आ सकती हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल का आयात

भारत पहले ईरान से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसमें कमी आई है।

  • प्रभाव: ईरान में महंगाई और मुद्रा (रियाल) के पतन से वहां का तेल उत्पादन क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो भविष्य में भारत द्वारा रियाल या रुपया व्यापार तंत्र के माध्यम से तेल व्यापार शुरू करने की संभावनाओं को धक्का लग सकता है।

‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC)

भारत, रूस और ईरान मिलकर इस गलियारे पर काम कर रहे हैं ताकि यूरोप तक व्यापार आसान हो सके।

  • प्रभाव: ईरान इस रूट का मुख्य केंद्र है। वहां की आंतरिक अस्थिरता इस वैश्विक व्यापार मार्ग की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकती है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए जोखिम बढ़ जाएगा।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा

ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र, व्यापारी और विशेषकर नाविक (Seafarers) रहते हैं।

  • प्रभाव: प्रदर्शनों के हिंसक होने के कारण भारत सरकार की प्राथमिकता वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हाल ही में भारत ने एक एडवाइजरी भी जारी की है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो भारतीयों को वहां से निकालने (Evacuation) की चुनौती सामने आ सकती है।

कूटनीतिक संतुलन (Diplomatic Balancing)

भारत के लिए यह स्थिति बहुत नाजुक है क्योंकि उसके संबंध ईरान और अमेरिका (जो प्रदर्शनों का समर्थन कर रहा है) दोनों के साथ हैं।

  • प्रभाव: भारत आमतौर पर अन्य देशों के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता है। हालांकि, मानवाधिकारों के मुद्दे पर वैश्विक दबाव के बीच भारत को ‘तटस्थता’ बनाए रखने के लिए कड़ी कूटनीतिक परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद

ईरान की अस्थिरता का असर पूरे पश्चिम एशिया (Middle East) पर पड़ता है।

  • प्रभाव: यदि ईरान में सत्ता कमजोर होती है या गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो इसका सीधा असर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों पर पड़ेगा, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील है।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

सऊदी अरब के अल-खरज में मिसाइल हमले के बाद का मंजर और भारतीय दूतावास की सुरक्षा गाइडलाइंस।

सऊदी अरब के अल-खरज पर मिसाइल हमला: भारतीय दूतावास ने जारी की एडवायजरी, जानें ताजा अपडेट

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच रविवार को सऊदी अरब के अल-खरज …