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उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना 2026: अपने पूर्वजों के नाम पर कराएं गांव का विकास, जानें आवेदन प्रक्रिया और लाभ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मातृभूमि योजना’ उन लोगों के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहते हैं और अपने पैतृक गांव के विकास में योगदान देना चाहते हैं। इस योजना के माध्यम से कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने पूर्वजों की स्मृति में गांव के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बना सकती है।

?️ योजना का मुख्य स्वरूप: 60-40 का फॉर्मूला

मातृभूमि योजना जन-भागीदारी (Public Participation) के मॉडल पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार और नागरिकों के सहयोग से ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

  • दानदाता का अंशदान: कुल परियोजना लागत का 60%

  • सरकार का अंशदान: शेष 40% धनराशि राज्य सरकार वहन करेगी।

  • विशेष सम्मान: परियोजना पूरी होने के बाद उस भवन या कार्य का नाम दानदाता की इच्छानुसार उनके पूर्वजों के नाम पर रखा जाएगा। साथ ही, वहां एक शिलापट (Plaque) भी लगाया जाएगा।

?️ किन विकास कार्यों के लिए कर सकते हैं दान?

योजना के तहत आप गांव में निम्नलिखित सुविधाओं के निर्माण या सुधार के लिए प्रस्ताव दे सकते हैं:

  1. शिक्षा और स्वास्थ्य: स्कूल भवनों का निर्माण, स्मार्ट क्लास, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या उप-केंद्र।

  2. सुविधाएं: सामुदायिक भवन, बारात घर, आरओ वाटर प्लांट, सार्वजनिक शौचालय।

  3. खेल और कौशल: खेल का मैदान, स्टेडियम, ओपन जिम, लाइब्रेरी, कौशल विकास केंद्र।

  4. आधुनिकीकरण: सीसीटीवी कैमरा, सोलर स्ट्रीट लाइट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), बस स्टैंड।

  5. अन्य: पशु नस्ल सुधार केंद्र, अग्नि सेवा केंद्र, श्मशान घाट का सुंदरीकरण।

? आवेदन की चरणबद्ध प्रक्रिया (Step-by-Step)

इच्छुक व्यक्ति अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सीधे आवेदन कर सकते हैं:

  1. पंजीकरण (Registration): सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल mbhumi.upprd.in पर जाकर बतौर ‘दाता’ (Donor) पंजीकरण करें। यहाँ आपको मोबाइल नंबर और ईमेल की आवश्यकता होगी।

  2. परियोजना का चयन: लॉगिन करने के बाद, ‘Register your Project’ विकल्प पर जाएं और उस कार्य का चयन करें जिसे आप अपने गांव में कराना चाहते हैं।

  3. DPR और स्वीकृति: आपके प्रस्ताव के बाद, संबंधित विभाग (जैसे पंचायती राज) प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगा।

  4. धनराशि जमा करना: प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद, आपको अपने हिस्से की 60% राशि योजना के विशेष बैंक खाते में जमा करनी होगी।

  5. कार्य का निष्पादन: राशि जमा होने के 30 दिनों के भीतर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) द्वारा कार्य शुरू करने की अनुमति दी जाती है। आप अपनी पसंद की कार्यदायी संस्था (Agency) से भी काम करवा सकते हैं।

? योजना के लाभ और महत्व

  • भावनात्मक जुड़ाव: शहरों या विदेशों (NRI) में रह रहे लोगों को अपनी जन्मभूमि के विकास से जुड़ने का सीधा मंच मिलता है।

  • पारदर्शिता: यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होती है और दाता स्वयं कार्य की प्रगति की निगरानी कर सकता है।

  • सामाजिक प्रतिष्ठा: पूर्वजों के नाम पर स्थायी संपत्तियों का निर्माण समाज में परिवार के सम्मान को बढ़ाता है।

  • त्वरित विकास: सरकार की आर्थिक मदद से बड़े प्रोजेक्ट्स (जैसे डिग्री कॉलेज या अस्पताल) कम समय में पूरे हो पाते हैं।

? संपर्क और सहायता

किसी भी तकनीकी समस्या या अधिक जानकारी के लिए आप इन माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:

  • हेल्पलाइन नंबर: 0522-3539400, 8127947062

  • ईमेल: [email protected]

  • कार्यालय: पंचायती राज निदेशालय, अलीगंज, लखनऊ।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।