लोड हो रहा है...

बड़ी खबर: लोकसभा में खत्म हुआ डेढ़ महीने का गतिरोध, 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन वापस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. भारतीय संसद के निचले सदन ‘लोकसभा’ से आज एक बड़ी खबर सामने आई है। पिछले डेढ़ महीने से जारी गतिरोध के बाद, मंगलवार को सदन ने एक स्वर में विपक्ष के 8 सांसदों का निलंबन रद्द कर दिया है। यह फैसला संसदीय लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती कड़वाहट को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

ध्वनि मत से पारित हुआ प्रस्ताव

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जैसे ही सांसदों का निलंबन वापस लेने का प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा, इसे ध्वनि मत (Voice Vote) से सर्वसम्मति मिल गई। इस दौरान सदन का माहौल पिछले दिनों के मुकाबले काफी शांत और सहयोगात्मक नजर आया।

खेद जताने के बाद पिघली बर्फ

इस सुलह का मुख्य आधार कांग्रेस के मुख्य सचेतक के. सुरेश का वह बयान बना, जिसमें उन्होंने कुछ सदस्यों द्वारा की गई “अनजाने में हुई चूक” पर औपचारिक रूप से खेद जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष का उद्देश्य सदन की कार्यवाही में बाधा डालना नहीं, बल्कि जनता की आवाज उठाना है।

“सदन की गरिमा बनाए रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। हम चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन उम्मीद करते हैं कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।”

— धर्मेंद्र यादव, समाजवादी पार्टी

कौन थे वे 8 सांसद?

बता दें कि इन सांसदों को 3 फरवरी 2026 को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान अनुशासनहीनता और वेल (Well) में आकर नारेबाजी करने के आरोप में निलंबित किया गया था। इनमें शामिल हैं:

  1. गुरजीत सिंह औजला (कांग्रेस)

  2. हिबी ईडेन (कांग्रेस)

  3. सी. किरण कुमार रेड्डी (कांग्रेस)

  4. अमरिंदर सिंह राजा वारिंग (कांग्रेस)

  5. मानिकम टैगोर (कांग्रेस)

  6. प्रशांत पाडोले (कांग्रेस)

  7. डीन कुरियाकोस (कांग्रेस)

  8. एस. वेंकटेशन (CPI-M)

‘लक्ष्मण रेखा’ का जिक्र और भविष्य की राह

प्रस्ताव पारित होने के दौरान किरेन रिजिजू ने सांसदों को याद दिलाया कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन सदन की मर्यादा की एक “लक्ष्मण रेखा” होती है, जिसका पालन हर सदस्य को करना चाहिए।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दूसरे चरण में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और अनुदान मांगों पर चर्चा होनी बाकी है। ऐसे में सांसदों की वापसी से न केवल बहस की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि सरकार पर भी जवाबदेही का दबाव रहेगा।

आगे क्या?

निलंबन रद्द होने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि कल से सदन में पूर्ण उपस्थिति के साथ बजट की बारीकियों पर चर्चा होगी। देखना होगा कि क्या यह ‘शांति’ सत्र के अंत तक बनी रहती है या फिर किसी नए मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष फिर आमने-सामने होंगे।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।