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घबराएं नहीं! देश के पास है 45 दिनों का गैस और 60 दिनों का तेल भंडार; जानें सरकार ने क्यों की कारपूलिंग की अपील

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भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और पश्चिम एशिया संकट के दौरान तेल आपूर्ति का नक्शा।

नई दिल्ली । सोमवार, 11 मई 2026

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आ रहे व्यवधानों के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) का पर्याप्त भंडार मौजूद है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशवासियों से ईंधन बचाने और विलासिता वाली वस्तुओं के आयात में कमी लाने का आह्वान किया है।

ईंधन संकट पर सरकार का आधिकारिक रुख

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि भारत के पास वर्तमान में निम्नलिखित सुरक्षित भंडार मौजूद हैं:

  • कच्चा तेल: 60 दिनों का स्टॉक।

  • प्राकृतिक गैस: 60 दिनों का स्टॉक।

  • एलपीजी (LPG): 45 दिनों का रोलिंग स्टॉक।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ‘अनौपचारिक मंत्री समूह’ (IGoM) की 5वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए जनता से अपील की कि वे घबराएं नहीं (Panic Booking न करें)। उन्होंने कहा कि सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और उर्वरकों (Fertilizers) की भी कोई कमी नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी की सात सूत्रीय ‘बचत’ अपील

हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए नागरिकों से विशेष सहयोग मांगा:

  1. सोने की खरीदारी टालें: भारत बड़े पैमाने पर सोना आयात करता है। पीएम ने आग्रह किया कि कम से कम एक साल तक शादियों या निवेश के लिए सोने की खरीदारी से बचें ताकि विदेशी मुद्रा बचाई जा सके।

  2. ईंधन की बचत: निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस और कारपूलिंग का उपयोग करें। माल ढुलाई के लिए रेलवे को प्राथमिकता दें।

  3. खाद्य तेल में 10% कटौती: भारत खाद्य तेलों का भी बड़ा आयातक है। पीएम ने स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों के हित में तेल के उपयोग में 10% की कटौती की सलाह दी।

  4. वर्क फ्रॉम होम की वापसी: अनावश्यक यात्रा कम करने के लिए कंपनियों से ‘वर्क फ्रॉम होम’ और वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया।

  5. विदेश यात्राएं टालें: मध्यम वर्ग से अपील की गई कि वे अगले एक साल तक गैर-जरूरी विदेश यात्राओं और डेस्टिनेशन वेडिंग से बचें।

  6. वोकल फॉर लोकल: विदेशी सामानों की जगह ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को प्राथमिकता दें।

  7. प्राकृतिक खेती: उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए किसानों से प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ने का आह्वान किया।

आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम

सरकार ने रणनीतिक रूप से आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई उपाय किए हैं:

  • रूस से आयात: भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर अपनी आपूर्ति को विविधता प्रदान की है।

  • रिफाइनरी क्षमता: घरेलू रिफाइनरियां मांग पूरी करने के लिए 100% से अधिक क्षमता पर चल रही हैं।

  • एलपीजी सप्लाई: पिछले तीन दिनों में मांग से अधिक सिलेंडर (1.26 करोड़) वितरित किए गए हैं।

निष्कर्ष 

भ्रामक सूचनाओं के विपरीत, देश में ईंधन का कोई भौतिक अभाव नहीं है। सरकार की अपील केवल “आर्थिक सावधानी” और “विदेशी मुद्रा संरक्षण” के लिए है ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारतीय रुपये और मुद्रास्फीति (Inflation) पर न पड़े।

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