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टीपू सुल्तान : महान योद्धा या एक खलनायक

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– सारांश कनौजिया

टीपू सुल्तान का नाम जब भी आता है, तो उसके समर्थक उसे एक महान योद्धा बताते हैं। उसने अंग्रेजों से युद्ध किया था, इसलिए उसे स्वतंत्रता सेनानी या क्रांतिकारी भी कहकर उसका महिमामंडन किया जाता है। उसे आधुनिक भारत में मिसाइल या राकेट का जनक भी बताया जाता है। किन्तु यह अर्द्धसत्य है। पूरी बात समझने के लिये यह जानना जरुरी है कि जिस साम्राज्य के लिये उसने अंग्रेजों से संघर्ष किया, उसने वह कैसे खड़ा किया।

कर्नाटक के देवनाहल्ली में नवंबर 1750 को जन्में सुल्तान फतेह अली खान शाबाह का नाम ही बाद में टीपू सुल्तान पड़ा। उसके पिता हैदर अली मैसूर साम्राज्य में सैनिक थे, लेकिन बाद में वो अपनी ताकत के बल पर मैसूर का राजा बन गया। टीपू सुल्तान को उसके पिता ने ही सबसे पहले शेर-ए-मैसूर कहा था, जिस नाम से उसे कई लोग आज भी पुकारते हैं। टीपू सुल्तान 29 दिसंबर 1782 में मैसूर का राजा बना और 4 मई 1799 में अंग्रेजों और निजाम की संयुक्त सेना से युद्ध करते हुए वह मारा गया।

टीपू सुल्तान के प्रशंसक उसे अंग्रेजों से संघर्ष करने वाला महान राजा बताते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि वो अंग्रेजों से अपने साम्राज्य को स्वतंत्र कराना चाहता था। उसे स्वतंत्रता से कोई मतलब नहीं था, वह सिर्फ अपना शासन बनाये रखने के लिये संघर्ष कर रहा था। उसने इसके लिए फ्रांसीसियों से भी सहायता ली और अंग्रेजों से संधि भी की। अंग्रेजों से अपने शासन को बचाये रखने के प्रयास में टीपू सुल्तान के पिता की मौत हो गई। यह युद्ध 1780 से 1784 तक चला। अर्थात टीपू सुल्तान ने अपने पिता की मौत के बाद भी युद्ध लड़ना जारी रखा। लेकिन उसने 1784 में अंग्रेजों से संधि कर ली। इसे मैंगलोर संधि भी कहा जाता है। इसी के साथ अंग्रेजों और हैदर अली के वंशजों के बीच यह दूसरा युद्ध समाप्त हो गया।

अंग्रेज अपनी विस्तारवादी नीति के लिये जाने जाते थे और टीपू सुल्तान अपनी कट्टरता के लिये। अंग्रेज इसाई सम्प्रदाय के आधार पर सत्ता चाहते थे और टीपू सुल्तान शरीयत के अनुसार। इसलिए यह संधि बहुत अधिक समय तक नहीं चल सकी। 1786 में लार्ड कार्नवालिस गवर्नर जनरल बना। उसने दक्षिण में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिये हैदराबाद के निजाम से हाथ मिला लिया। टीपू सुल्तान को यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उसने दक्षिण भारत में अपने एकाधिकार के लिये फ्रांसीसियों से हाथ मिला लिया और मुस्लिम शासक (निजाम) के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। निजाम ने अंग्रेजों के साथ मिलकर टीपू सुल्तान पर आक्रमण कर दिया। टीपू सुल्तान को हारकर 1792 में श्रीरंगपट्टनम संधि करनी पड़ी, जिसमें उसे अपना आधा राज्य सहित बहुत कुछ देना पड़ा।

इस युद्ध से एक बात और स्पष्ट हो जाती है कि टीपू सुल्तान एक महत्वकांक्षी व्यक्ति था। इस्लाम की मान्यताओं में किसी मुस्लिम शासक से दुश्मनी को गलत बताया गया है, लेकिन अपने सत्ता विस्तार के लिये टीपू सुल्तान ने उनसे भी बैर ले लिया था। इस दूसरी संधि के लिये टीपू सुल्तान अंग्रेजों को दोषी मानता था। इसलिए अब वह अंग्रेजों से इसका बदला चाहता था। टीपू सुल्तान इसके लिये फ्रांसीसियों की सहायता से अपनी ताकत बढ़ा रहा था। उस समय लार्ड वेलेजली गवर्नर जनरल बन चुका था। एक बार फिर हैदराबाद के निजाम और अंग्रेज साथ आये। उन्होंने मराठाओं को भी साथ लेकर टीपू सुल्तान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। इसी युद्ध में टीपू सुल्तान मारा गया था। यदि पहले युद्ध को छोड़ दें, तो शेष दोनों युद्ध एक तरह से टीपू सुल्तान ने हैदराबाद के निजाम के खिलाफ लड़े। यदि टीपू सुल्तान एक स्वतंत्रता सेनानी था, तो क्या तत्कालीन निजाम एक देशद्रोही और अत्याचारी शासक था?

हैदर अली की तरह ही टीपू सुल्तान एक कट्टर मुसलमान था या फिर कह सकते हैं कि दोनों ही धर्मांध थे। कुछ लोग उसे हिन्दुओं का हितैषी सिद्ध करने के लिये विभिन्न उदाहरण देते हैं। दरअसल अंतिम दोनों युद्धों में मराठा शामिल थे। उन्हें हिन्दुत्व समर्थक माना जाता है। इसलिए टीपू सुल्तान ने कुछ कार्य हिन्दुओं को अपने साथ मिलाने के लिये दिखावे में किये हों, ऐसा संभव है। लेकिन उसने अपने सत्ताा विस्तार के लिये हिन्दुओं के साथ जो अत्याचार किये, उन्हें भी भुलाया नहीं जा सकता है।

लेखक चिदानंद मूर्ति के अनुसार टीपू सुल्तान ने मालाबार जैसे तटीय क्षेत्रों में रहने वाले हिन्दुओं पर बहुत अत्याचार किये। उसने 1783 में पालघाट किले पर हमला कर हमारों हिन्दुओं की हत्या की। राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा के अनुसार टीपू सुल्तान ने हिन्दू मंदिरों व चर्चों को तोड़ा। उसके शासन में हिन्दुओं का धर्मांतरण हुआ। हिन्दू महिलाओं का चीरहरण भी किया गया। इन बातों की पुष्टि कई लेखकों ने भी की है। विलियम लोगान ने अपनी किताब ‘मालाबर मैनुअल’ में लिखा है कि टीपू सुल्तान ने कालकट में आक्रमण कर हिन्दू मंदिरों को तोड़ दिया। उसने महिलाओं की हत्या कर दी और उनके बच्चों को उन्हीं के गले में बांध कर लटका दिया।

केट ब्रिटलबैंक ने अपनी किताब ‘लाइफ ऑफ टीपू सुल्तान’ में लिखा है कि मालाबार में टीपू सुल्तान ने एक लाख से अधिक हिन्दुओं को मजबूर कर मुसलमान बना दिया। उनके बच्चों को भी इस्लामी शिक्षा के लिये विवश किया गया। उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखकर तय करना चाहिए की टीपू सुल्तान कौन था? एक अत्याचारी या अंग्रेजों व मुस्लिम शासक से लड़ने वाला स्वतंत्रतासेनानी।

चित्र साभार : आज तक

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

 

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