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रामास्वामी बने अमेरिकी राष्ट्रपति, तो व्हाइट हाउस में रखे जायेंगे अजीब देवता : पादरी कुनीमन

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वॉशिंगटन. अमेरिका मे अगले साल चुनाव होने वाले हैं। विवेक रामास्वामी पिछले कुछ हफ्तों में एक प्रमुख रिपब्लिकन उम्मीदवार के तौर पर सामने आए हैं। खास कर उन लोगों के लिए जो डोनाल्ड ट्रंप का विकल्प खोज रहे हैं। विवेक एक धर्मनिष्ठ हिंदू हैं और ऐसे में उनकी आस्था उनके व्हाइट हाउस पहुंचने में बाधा बन सकता है। ट्रंप समर्थक पादरी और स्वघोषित पैगंबर और चुनाव से इनकार करने वाले हैंक कुनीमन ने रामास्वामी पर उनकी आस्था को लेकर हमला किया है।

मीडियो रिपोर्ट के मुताबिक द रोलिंग स्टोन्स में लिखे एक लेख के मुताबिक कुन्नमैन ने हाल के अपने उपदेश में रामास्वामी की आस्था पर हमला करते हुए दावा किया कि इस ‘नए युवा व्यक्ति’ से खतरा है। उन्होंने दावा किया, ‘अगर यह प्रभु यीशु मसीह की सेवा नहीं करता है तो आपका ईश्वर से झगड़ा होगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम क्या कर रहे हैं? क्या आप किसी व्यक्ति को बाइबल के अलावा किसी अन्य चीज पर अपना हाथ रखने देंगे? क्या आप उसे अपने सभी अजीब देवताओं को व्हाइट हाउस में रखने देंगे?’

पादरी का नहीं है चुनाव- रामास्वामी

कुन्नमैन ने आगे कहा कि अगर कोई यीशु का नाम नहीं लेता तो वह इस बात की परवाह नहीं करते कि किसी की नीतियां कितनी अच्छी हैं? रामास्वामी ने कभी भी अपने हिंदू होने को नहीं नकारा है। अपने विरोधियों को जवाब देते हुए वह कह चुके हैं कि यह चुनाव पादरी का नहीं बल्कि अमेरिका के कमांडर इन चीफ का है। रामास्वामी का दावा है कि वास्तविक विभाजन हिंदू, ईसाई या यहूदी धर्म के लोगों के बीच नहीं है। बल्कि सच्चे ईश्वर को मानने वालों और उन लोगों के बीच है जिन्होंने जगह को भरने के लिए वोकिज्म, ट्रांसजेंडरिज्म, जलवायुवाद और कोविडिज्म जैसे नए धर्मों में बदल दिया है।
पादरी कर रहे आलोचना

रामास्वामी ने कहा कि उनके विश्वास से काफी लाभ होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी मुझे ईसाई राष्ट्रवादी कह कर हमला नहीं कर सकता। हालांकि रामास्वामी पर अन्य ईसाई राष्ट्रवादी हमला कर रहे हैं। ओक्लाहोमा के पादरी जॉन बेनेट ने उन्हें एक इंडोनेशियाई व्यक्ति बताते हुए कहा कि वह ईसाई होने का दावा कर रहे हैं, ताकि वह ईसाइयों का वोट पा सके। हालांकि रामास्वामी ने कभी भी ऐसा कोई दिखावा नहीं किया है।

साभार : नवभारत टाइम्स

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