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पुराने वक्फ अधिनियम में बदलाव के लिए मोदी सरकार संसद में पेश करेगी 2 विधेयक

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार मौजूदा मानसून सत्र में वक्फ बोर्ड में बदलाव को लेकर बिल पेश करेगी। जानकारी के अनुसार मोदी सरकार इससे जुड़े दो बिल लाएगी। एक बिल के जरिए मुसलमान वक्फ कानून 1923 को खत्म किया जाएगा। दूसरे बिल में वक्फ कानून 1995 में महत्वपूर्ण संशोधन होंगे। सरकार की मानें तो बिल लाने का उद्देश्य वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और संचालन करना है। ऐसे में सरकार द्वारा लाए जा रहे है बिल में क्या-क्या है?

  1. वक्फ बोर्ड में सुधार के लिए मोदी सरकार एक दो दिनो के भीतर ही संसद में एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, नाम से बिल लाएगी ।
  2. नये अधिनियम में वक्फ की संपत्ति को रजिस्टर करने के लिए केंद्रीयकृत पोर्टल के साथ साथ महिलाओं और बोहरा समाज के अधिकारो को सुरक्षित करने का भी प्रस्ताव है।
  3. खास बात ये है कि वक्फ संपत्ति विरासत में महिलाओं को ऐसी संपत्ति के उत्तराधिकार के अधिकार से वंचित नहीं करने का भी प्रस्ताव किया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इसके जरिए मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण की योजना है ।
  4. इसके अलावा नये कानून में वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण के लिए सर्वेक्षण आयुक्त या डिप्टी कलेक्टर के पद से नीचे के किसी अन्य अधिकारी को कलेक्टर द्वारा नामित नहीं किया जा सकेगा , यानी वक्फ की संपत्तियों का सर्वे भी किया जाएगा।
  5. आपको बता दें सच्चर कमेटी ने अपनी सिफ़ारिश में बोर्ड से जुड़ी संपत्तियों के साथ-साथ उनके राजस्व की मैपिंग की बात कही थी । बोर्ड के पास देश में रेलवे और डिफेंस के बाद सबसे अधिक जमीन है, लेकिन इसके मुकाबले इससे आने वाला राजस्व काफी कम है ।
  6. नये प्रावधान के तहत केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुसलमानों का प्रतिनिधित्व भी बोर्ड में सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा बोहरा और आगाखानियों के लिए अलग औकाफ बोर्ड की स्थापना की जाएगी।
  7. बोर्ड में मुस्लिम समुदायों के बीच शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी और अन्य पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व होगा।
  8. वक्फ संपत्ति का पंजीकरण एक केंद्रीय पोर्टल और डेटाबेस के माध्यम से होगा । इसके अलावा नये कानून में किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज करने से पहले सभी संबंधितों को उचित नोटिस के साथ राजस्व कानूनों के अनुसार उत्परिवर्तन के लिए एक विस्तृत प्रक्रिया प्रदान करने का भी प्रस्ताव किया गया है।
  9. नए विधेयक में प्रावधान है कि बोर्ड अब यह तय करने का एकमात्र प्राधिकारी नहीं होगा कि कोई संपत्ति वास्तव में वक्फ संपत्ति है या नहीं। इसके अलावा विधेयक में कम से कम 5,000 रुपये की शुद्ध वार्षिक आय वाले प्रत्येक वक्फ के ‘मुतवल्ली’ द्वारा बोर्ड को देय वार्षिक योगदान को सात प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
  10. विधेयक में वक्फ के गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण के लिए एक केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से खातों को दाखिल करने का प्रावधान करने का भी प्रस्ताव है।
  11. नए कानून में यह भी प्रस्ताव है कि ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ 90 दिनों की निर्दिष्ट अवधि के भीतर उच्च न्यायालय में अपील करने के अलावा ट्रिब्यूनल संरचना को दो सदस्यों के साथ पुनर्गठित किया जाए।

जानें कैसी होगी काउंसिल?

जानकारी के अनुसार वक्फ काउंसिल का चेयरपर्सन अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री होगा। राज्यसभा और लोकसभा के 3 सांसद भी इसके सदस्य होंगे। इसके अलावा मुस्लिम संगठनों के 3 लोग, वक्फ का मुतल्लवी जिसकी आय 5 लाख से ज्यादा हो, 3 मुस्लिम स्काॅलर, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के 2 पूर्व जज, 1 वकील और 4 राष्ट्रीय महत्व के लोग इसमें शामिल होंगे। इन सबके इतर मुस्लिम समाज से नामित होने वाली 2 महिलाएं भी इस काउंसिल की सदस्य होंगी।

साभार : न्यूज़24

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