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बस्तर : द नक्सल स्टोरी – एक रिव्यू

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. बस्तर : द नक्सल स्टोरी, छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की नक्सली समस्या पर आधारित है. इस फिल्म की घोषणा जून 2023 में हुई थी. यह फिल्म 15 मार्च को रिलीज होने वाली है. फिल्म में अभिनेत्री अदा शर्मा, आईपीएस नीरजा के रूप में मुख्य भूमिका निभाई है. फिल्म का निर्माण सनशाइन पिक्चर ने किया है. सुदीप्तो सेन फिल्म के निर्देशक होने के साथ-साथ इसके कहानी लेखक भी हैं. कहानी लेखन में अमरनाथ झा ने उनकी मदद की है. फिल्म निर्माता विपुल शाह इससे पहले कश्मीर फाइल्स जैसे फिल्में भी बना चुके हैं.

यदि फिल्म की कहानी के बारे में बात करें तो निर्माताओं द्वारा इसके तीन वीडियो रिलीज किये गए हैं. 1.16 मिनट के वीडियो में आईपीएस नीरजा (अदा शर्मा) दावा करती हैं कि बस्तर में बैठे नक्सली भारत के टुकड़े करना चाहते हैं. उनका दावा है कि इनका साथ बड़े शहरों में बैठे तथाकथित वामपंथी बुद्धिजीवी दे रहे हैं. 2.36 मिनट के दूसरे वीडियो के अनुसार नक्सलवाद विश्व का तीसरा सबसे खतरनाक संगठन है. तीसरे वीडियो में एक मात्र रिलीज गीत है, जो बलिदान सुरक्षाकर्मियों को समर्पित है और नक्सलवाद की विभीषिका को दिखाता है. बक्सर में नक्सलियों ने सुरक्षाबलों की दर्दनाक हत्या कर दी. भारत के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में इसका जश्न मनाया गया. हमारे सुरक्षाबलों को कुत्ता कहकर संबोधित किया गया है.

इस वीडियो में अदा शर्मा सुरक्षाबलों के हितों और नक्सलवादियों से संघर्ष करने के लिए सत्ताधारी नेता से भी भिड़ती हुई दिखाई देती हैं. नक्सलियों के साथ लड़ाई में पाकिस्तान से युद्ध में भारत के लिए बलिदान होने वाले सुरक्षाबलों की संख्या से लगभग दोगुनी है. वीडियो में दिखाया गया है कि भारत का झंडा फहराने पर नक्सली बक्सर में एक युवक को दर्दनाक मौत दे देते हैं. ये नक्सली लोगों को डरा कर हर घर से एक बच्चे को लेकर जाते हैं और उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल कर लेते हैं. नक्सलवादी और इनके समर्थक दिल्ली में तिरंगा झंडा हटाकर, वामपंथी झंडा लगाना चाहते हैं. इन्हें भारत के बाहर से भी समर्थन मिल रहा है.

अदा शर्मा की दमदार भूमिका और फिल्मांकन इसे सशक्त फिल्म बनाती है. यह फिल्म नक्सलवाद की समस्या का काला सच और उसके पीछे शामिल सफेद पोश लोगों को बेनकाब करती है. इसे एक देशभक्ति से जुड़ी फिल्म कहा जा सकता है, जो एक ज्वलंत मुद्दे को भी उठाती है. मातृभूमि समाचार फिल्म को 5 में से 4.5 स्टार देती है.

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।