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कैंसर से पीड़ित अभिनेता अतुल परचुरे का 57 वर्ष की आयु में निधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. जाने-माने अभिनेता अतुल परचुरे का 57 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। अभिनेता कैंसर से पीड़ित थे। वह ‘द कपिल शर्मा शो’ सहित कई टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में अपनी उपस्थिति के लिए जाने जाते थे। अतुल परचुरे एक प्रतिभाशाली अभिनेता थे, जो पिछले एक साल से कैंसर से जूझ रहे थे। 14 अक्टूबर को उनका निधन हो गया। उनके निधन से मनोरंजन जगत में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।

टीवी से लेकर फिल्मों तक किया शानदार काम

अभिनेता ने टेलीविजन और फिल्मों दोनों जगह ही अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘आरके लक्ष्मण की दुनिया’, ‘जागो मोहन प्यारे’, ‘यम हैं हम’, ‘बड़ी दूर से आए हैं’, ‘द कपिल शर्मा शो’ और कई मराठी धारावाहिकों और लोकप्रिय कॉमेडी शो में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। टीवी के अलावा अभिनेता  हिंदी और मराठी फिल्मों में दिखाई दिए, जहां अपनी कॉमेडी और कॉमिक टाइमिंग से वह दर्शकों के पसंदीदा बन गए।

कैंसर का पता चलने के बाद नहीं आती थी नींद

अभिनेता ने खासकर  कॉमेडी के क्षेत्र में गहरा प्रभाव छोड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल जुलाई में बॉम्बे टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में अभिनेता ने खुलासा किया था कि उनके लिए कैंसर का पता चलने के बाद उसे स्वीकार करना आसान था। उन्होंने कहा था, ‘मैं मानसिक रूप से तैयार था कि मेरे साथ कुछ गड़बड़ है। सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने के बावजूद, काम ना करने की वजह से “रातों की नींद हराम” कर दी। ऐसा नहीं है कि मेरे दिमाग में नकारात्मक विचार नहीं आते थे। मुझे इस चिंता में कई रातें जागकर गुजारनी पड़ीं कि मैं कब काम पर वापस लौटूंगा। एक तरफ, आय बंद हो गई, जबकि खर्च शुरू हो गए और कैंसर के इलाज की लागत बहुत अधिक है।

परिवार ने दिया भरपूर साथ

उसी साक्षात्कार में, अभिनेता ने मेडिक्लेम के महत्व पर भी जोर दिया था, जिसने उन्हें वित्तीय बोझ को संभालने में मदद की। उन्होंने साझा किया था, ‘मेडिक्लेम ने मेरी बचत के साथ-साथ मुझे आंशिक रूप से बचाया, नहीं तो यह बहुत मुश्किल होता। मुझे कभी भी निराशा महसूस नहीं हुई क्योंकि मेरे परिवार ने कभी भी मेरे साथ एक मरीज की तरह व्यवहार नहीं किया।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।