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झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए जेएमएम और कांग्रेस में तय हुआ सीट शेयरिंग फॉर्मूला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

रांची. झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टियों के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में से 70 सीटों पर जेएमएम और कांग्रेस चुनाव लड़ेगी. इसके अलावा बाकि बची हुई सीटों पर आरजेडी, सीपीएम माले और उनके अन्य सहयोगी चुनाव लड़ेंगे. सीएम सोरेन ने इन सीटों पर कौन कहां से चुनाव लड़ेगा ये तय किया जाएगा. हालांकि जेएमएम और कांग्रेस कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इसका खुलासा अभी मुख्यमंत्री ने नहीं किया. जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस के झारखंड प्रभारी गुलाम अहमद मीर की उपस्थिति में सीट शेयरिंग का ऐलान किया. हालांकि इस मौके पर आरजेडी और वाम दल के प्रतिनिधि उपस्थित नहीं थे.

‘सहयोगी दलों से हो रही बातचीत’

मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बातचीत हो रही है. हेमंत सोरेन ने बताया कि आरजेडी और सीपीआईएल से बातचीत से यह भी साफ हो जाएगा कि कांग्रेस और जेएमएम किन-किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बता दें कि झारखंड में दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को वोटिंग होगी. वहीं 23 नवंबर को वोटों की गिनती की जाएगी. वहीं झारखंड में एनडीए ने पहले ही सीटों का बंटवारा कर लिया है. प्रदेश की 81 सीटों में से बीजेपी 68 सीटों पर, आजसू 10 सीटों पर और जेडीयू 2 और लोजपा (रामविलास) एक सीट पर चुनाव लड़ेगी.

‘सत्ता में वापसी का किया दावा’

वहीं इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को फिर से सत्ता में वापसी का दावा किया था. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने विकास कार्यों पर पूरा भरोसा है. उनकी सरकार ने आदिवासियों, गरीबों और वंचितों सभी के लिए काम किया है. झामुमो केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि एक बड़े पेड़ की तरह है. जिसके नीचे झारखंड के लगभग 3 करोड़ लोग शांति और सद्भाव से रह रहे हैं. बता दें कि 2019 के विधानसभा चुनाव झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 43 सीटों पर और कांग्रेस ने  31 सीटों पर चुनाव लड़ा था. जिसमें से जेएमएम को 30 सीटों पर और कांग्रेस को 16 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं सात सीटों पर चुनाव लड़ रहे आरजेडी सिर्फ एक सीट ही जीत पाई थी. इस चुनाव में आरजेडी का प्रदर्शन सबसे खराब रहा था.

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।