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मुंबई आतंकवादी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को अमेरिका की अदालत ने दी मंजूरी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

वाशिंगटन. मुंबई में 2008 में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा भारत लाया जाएगा। अमेरिका की अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। अब भारत ने उसे यहां लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। भारत ने अमेरिका से तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण मांगा था। राणा ने निचली अदालतों में याचिका दायर करके प्रत्यर्पण को रोकने की मांग की थी, मगर कोर्ट से उसे राहत नहीं मिली। इन अदालतों के फैसले राणा का भारत प्रत्यर्पण करने के पक्ष में थे।

इसके बाद 13 नवंबर को राणा ने अमेरिकी कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उसने वही दलील दी, जो उसने पहले निचली अदालतों में दी थी कि 2008 के मुंबई आतंकी हमले के आरोपों में उसे शिकागो की एक संघीय अदालत ने मुकदमे से बरी किया है। राणा की याचिका को बाइडन प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से खारिज करने की मांग की थी।

अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल प्रीलोगर आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा की याचिका से असहमत थे। उन्होंने कहा था कि सरकार नहीं मानती कि जिस आचरण पर भारत प्रत्यर्पण चाहता है वह अमेरिकी सरकार के अभियोजन के दायरे में था। भारत का जालसाजी के आरोप संयुक्त राज्य अमेरिका से अलग है। आरोपी ने इमिग्रेशन लॉ सेंटर का शाखा कार्यालय खोलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को सौंपे गए आवेदन में गलत जानकारी दी है। अब अमेरिकी कोर्ट ने राणा की याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है। भारत ने उसे यहां लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

यह था मुंबई हमला

साल 2008 में पाकिस्तान से नाव में आए लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने करीब 60 घंटे तक मुंबई को बंधक बनाए रखा था। आतंकियों ने इस दौरान 160 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने नौ आतंकियों को मौके पर ढेर कर दिया था, जबकि एक आतंकी अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया था। जिसे बाद में फांसी दे दी गई थी। मुंबई आतंकी हमले में मरने वाले लोगों में 26 विदेशी नागरिक भी थे।

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अमेरिका में किया गया था गिरफ्तार

मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमलों में भूमिका को लेकर भारत द्वारा प्रत्यर्पण का अनुरोध किए जाने पर राणा को अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) 2008 में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए 26/11 के हमलों में राणा की भूमिका की जांच कर रही है। भारत ने 10 जून, 2020 को प्रत्यर्पण की दृष्टि से 62 वर्षीय राणा की अस्थायी गिरफ्तारी की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। बाइडन प्रशासन ने राणा के भारत प्रत्यर्पण का समर्थन किया था।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।