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बसंत पंचमी के अवसर पर महाकुंभ में 2.33 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. वसंत पंचमी पर महाकुंभ का तीसरा और अंतिम अमृत स्नान जारी है। हाथों में तलवार-गदा, डमरू और शंख। शरीर पर भभूत। आंखों पर काला चश्मा। घोड़े और रथ की सवारी। हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए साधु-संत स्नान के लिए संगम पहुंचे। सबसे पहले पंचायती निरंजनी अखाड़े के संत संगम में अमृत स्नान किया। फिर सबसे बड़े जूना अखाड़े के साथ किन्नर अखाड़े ने डुबकी लगाई। शाम 5 बजे तक सभी 13 अखाड़ों ने स्नान कर लिया।

संतों का आशीर्वाद लेने के लिए लाखों श्रद्धालु संगम पर थे। लोग नागा साधुओं की चरण रज माथे पर लगाते नजर आए। 30 से ज्यादा देशों के लोग भी अमृत स्नान देखने के लिए संगम पहुंचे। हेलिकॉप्टर से संगम पर 20 क्विंटल फूल बरसाए गए। संगम जाने वाले सभी रास्तों पर 10 किमी तक श्रद्धालुओं का रेला है। प्रयागराज जंक्शन से 8 से 10 किमी पैदल चलकर लोग संगम पहुंच रहे हैं। भीड़ को देखते हुए लेटे हनुमान मंदिर को बंद कर दिया गया है। मेला क्षेत्र के सभी रास्ते वन-वे हैं। भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक सोमवार को लखनऊ पहुंचे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन्हें रिसीव किया। भूटान नरेश मंगलवार को कुंभ जाएंगे। महाकुंभ का आज 22वां दिन है। 6 बजे तक 2.33 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया। 13 जनवरी से अब तक 34.97 करोड़ से ज्यादा लोग डुबकी लगा चुके हैं।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।