नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को वोटर लिस्ट मामले में नोटिस जारी किया है। आरोप है कि सोनिया गांधी भारत की नागरिकता लेने से पहले वोटर बन गईं। दिल्ली के राउज़ एवेन्यू सेशंस कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था। आरोप है कि सोनिया गांधी ने वर्ष 1980 में कथित रूप से अपने नाम को मतदाता सूची में शामिल कराया था। यह याचिका अधिवक्ता विकस त्रिपाठी ने दायर की है, जो राउज़ एवेन्यू कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी हैं।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से भी मांगा जवाब
राउज़ एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ केस दर्ज कराने की मांग वाली एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। दिल्ली के एक वकील ने वह आदेश चुनौती दी है, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया था। अब इस मामले में कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी। यह याचिका अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने दायर की है।
भारतीय नागरिकता लेने से पहले वोटर बनीं सोनिया गांधी!
इस मामले का केंद्र एक पुराना आरोप है जिसमें याचिका के अनुसार, 1980 की वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम शामिल था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता आधिकारिक तौर पर 30 अप्रैल 1983 को मिली। सवाल उठाया गया है कि जब वह भारतीय नागरिक नहीं थीं, तब 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम कैसे जोड़ा गया। याचिका में यह भी दावा है कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
याचिकाकर्ता ने पूछा है कि 1980 में उनका नाम जोड़ने के लिए कौन से दस्तावेज दिए गए थे और क्या कोई गलत या फर्जी कागज इस्तेमाल किए गए थे। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में इस मामले को खारिज कर दिया था। उसी आदेश के खिलाफ अब यह पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है, जिस पर राउस एवेन्यू कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।
साभार : नवभारत टाइम्स
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