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अमेरिका ने चीन पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की

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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चीन पर टैरिफ बम फोड़ दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर 1 नवंबर से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है. यह पहले से लगे टैरिफ से अलग होगा. ट्रंप ने कहा कि 1 नवंबर 2025 से अमेरिका चीन से आयातित सभी उत्पादों पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा. इसके अलावा, अमेरिका उसी दिन सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर भी निर्यात नियंत्रण लागू करने का निर्णय ले चुका है.

चीन और अमेरिका के बीच फिर शुरू हुआ ट्रैड वॉर

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में चीन पर टैरिफ लगाने की घोषण करते हुए कहा कि यह टैरिफ चीन पर वर्तमान में लागू किसी भी दूसरे टैरिफ से अतिरिक्त होगा. ट्रंप के इस कदम के बाद दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ वॉर चरम पर पहुंच गया है. ट्रंप ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क, साथ ही “किसी भी और सभी महत्वपूर्ण सॉफ़्टवेयर” पर अमेरिकी निर्यात नियंत्रण, 1 नवंबर से लागू होंगे, जो बीजिंग के “असाधारण रूप से आक्रामक” कदमों के विरोध में लागू हो रहे हैं. ट्रुथ पर उन्होंने कहा, ‘यह विश्वास करना असंभव है कि चीन ने ऐसा कदम उठाया होगा, लेकिन उन्होंने उठाया है, और बाकी सब इतिहास है.’ चीनी सामान पर मौजूदा समय में 30 प्रतिशत का अमेरिकी टैरिफ लागू है, जो ट्रंप ने बीजिंग पर फेंटेनाइल व्यापार में सहायता करने और कथित अनुचित व्यवहारों का आरोप लगाते हुए लगाया था.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्‍ट में क्‍या लिखा?

चीन का अमेरिका पर जवाबी टैरिफ वर्तमान में 10 प्रतिशत है. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल नेटवर्क पर एक लंबी पोस्ट में टैरिफ की धमकी दी थी, जिसमें कहा गया था कि चीन ने दुनिया भर के देशों को दुर्लभ मृदा खनिजों पर निर्यात नियंत्रण के बारे में विस्तृत पत्र भेजे हैं. स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर सैन्य हार्डवेयर और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक तक, हर चीज़ के निर्माण के लिए दुर्लभ खनिज महत्वपूर्ण हैं. चीन इन सामग्रियों के वैश्विक उत्पादन पर हावी हो रहा है. ट्रंप ने चीन के रुख को “बेहद शत्रुतापूर्ण” बताते हुए लिखा, “चीन को दुनिया को ‘बंदी’ बनाने की अनुमति किसी भी तरह से नहीं दी जानी चाहिए.”

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस महीने के अंत में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की अपनी योजना पर सवाल उठाया. जनवरी में ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद से यह दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के बीच पहली मुलाकात होगी. उन्होंने लिखा, “मुझे दो हफ्ते बाद दक्षिण कोरिया में APEC में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलना था, लेकिन अब ऐसा करने का कोई कारण नहीं दिखता.” बीजिंग की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.

साभार : एनडीटीवी

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