नई दिल्ली. पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते सैन्य तनाव और इजरायल-ईरान के बीच संभावित टकराव की आहट ने खाड़ी देशों में रह रहे 90 लाख से अधिक भारतीयों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ओमान जैसे देशों से भारतीयों की स्वदेश वापसी का सिलसिला युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है।
भारत सरकार ने अपनी ‘जीरो-टॉलरेंस फॉर रिस्क’ नीति के तहत दूतावासों को हाई अलर्ट पर रखा है और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर निकासी की प्रक्रिया को गति दी है।
1. किन देशों से हो रही है सबसे ज्यादा वापसी?
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक दबाव दुबई और अबू धाबी (UAE) के हवाई अड्डों पर देखा जा रहा है। यहाँ से भारत आने वाली उड़ानों में सीटों की मांग अचानक 40% तक बढ़ गई है।
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE): दुबई और शारजाह से सबसे ज्यादा प्रवासी लौट रहे हैं।
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कतर और बहरीन: यहाँ भी अनिश्चितता के चलते हजारों भारतीयों ने इमरजेंसी लीव लेकर घर लौटने का फैसला किया है।
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सऊदी अरब और कुवैत: यहाँ फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन भारतीय दूतावास लगातार ‘एडवाइजरी’ जारी कर रहे हैं।
2. भारत सरकार का ‘एक्शन प्लान’: ऑपरेशन की तैयारी
विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो सरकार ‘ऑपरेशन गंगा’ (यूक्रेन) या ‘वंदे भारत’ (कोविड-19) की तर्ज पर एक विशाल निकासी अभियान शुरू कर सकती है।
प्रमुख सरकारी कदम:
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एयरलाइंस को निर्देश: एयर इंडिया, इंडिगो और विस्तारा को खाड़ी देशों के लिए अतिरिक्त ‘फ्लाइट स्लॉट्स’ आवंटित किए गए हैं।
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किराये पर नियंत्रण: संकट का फायदा उठाकर टिकटों के दाम न बढ़ें, इसके लिए विमानन मंत्रालय ने एयरलाइंस के साथ बैठक की है। कई रूट्स पर किरायों में अस्थाई कटौती की गई है।
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हेल्प डेस्क की स्थापना: दिल्ली, मुंबई, कोच्चि और लखनऊ हवाई अड्डों पर विशेष ‘इमिग्रेशन काउंटर’ और सहायता केंद्र खोले गए हैं।
3. आर्थिक प्रभाव: रेमिटेंस (Remittance) पर संकट के बादल
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा (Remittance) प्राप्त करने वाला देश है, जिसमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी 50% से अधिक है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पलायन लंबा खिंचता है, तो:
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भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है।
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रोजगार का संकट: घर लौटे प्रवासियों के पुनर्वास की चुनौती खड़ी होगी।
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विमानन क्षेत्र: उड़ानों की संख्या बढ़ने से विमानन कंपनियों के राजस्व में अस्थाई उछाल तो आएगा, लेकिन संचालन जोखिम भी बढ़ेगा।
4. प्रवासियों में डर का कारण: सुरक्षा और कामकाज
खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों का कहना है कि संभावित मिसाइल हमलों और समुद्री व्यापार मार्गों (Red Sea) के बंद होने की खबरों ने डर पैदा कर दिया है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ या सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
“हमारा काम अभी चल रहा है, लेकिन परिवार की सुरक्षा को देखते हुए हमने फिलहाल भारत लौटना ही बेहतर समझा। स्थिति स्पष्ट होने पर ही वापस आएंगे।” – सुनील कुमार, दुबई में कार्यरत इंजीनियर।
5. विशेषज्ञों की राय और आगे की राह
विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि आने वाले 15 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम नहीं हुआ, तो वापसी करने वालों की संख्या दोगुनी हो सकती है।
भारतीय नागरिकों के लिए जरूरी सुझाव:
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केवल विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक वेबसाइट और दूतावास के सोशल मीडिया हैंडल पर दी गई जानकारी पर भरोसा करें।
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अपने पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी सुरक्षित रखें।
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दूतावास द्वारा जारी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को अपने पास सेव रखें।
भारत सरकार की मुस्तैदी और एयरलाइंस का सहयोग इस संकट की घड़ी में प्रवासियों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरा है। ‘सुरक्षा पहले’ के मंत्र के साथ भारत अपने नागरिकों को हर संभव सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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