रविवार, सितंबर 20 2026 | 04:19:34 PM

एबीवीपी के कार्यालय में घुसपैठ पर मनसे छात्र नेताओं पर दर्ज हुआ केस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. महाराष्ट्र के पुणे शहर में छात्र संगठनों के बीच पोस्टर विवाद ने सोमवार को हंगामे का रूप ले लिया। शहर के सदाशिव पेठ इलाके में स्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के दफ्तर में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के छात्र संगठन के कुछ कार्यकर्ता अचानक घुस गए और बवाल करने की कोशिश की। इस मामले में पुलिस ने एमएनएस छात्र संगठन के कुछ सदस्यों पर केस दर्ज किया है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, पुणे के वाडिया कॉलेज में कुछ जगहों पर पोस्टर लगाए गए थे जिनमें मनसे छात्र संगठन का बहिष्कार करने की बात लिखी थी। इन पोस्टरों पर एबीवीपी का नाम भी दर्ज था। इसके बाद मनसे छात्र संगठन के कुछ सदस्य नाराज हो गए और सीधे एबीवीपी के कार्यालय पहुंचकर हंगामा करने लगे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मनसे छात्र संगठन के सदस्यों ने कार्यालय में घुसकर दरवाजा बंद करने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया।

मामले में पुलिस की कार्रवाई

पुणे पुलिस ने मनसे छात्र संगठन के कुछ सदस्यों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस पोस्टर लगाने वाले अज्ञात व्यक्ति का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है।

एबीवीपी की प्रतिक्रिया

एबीवीपी के एक सदस्य ने बताया कि पोस्टर किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके संगठन के नाम से लगाए थे। उन्होंने कहा, ‘हमने इस बारे में मनसे छात्र संगठन के सदस्यों से बात भी की थी, लेकिन वे दिखावा करना चाहते थे, इसलिए दफ्तर में घुसकर हंगामा करने लगे।’

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पुलिस जांच में सुलझेगा पोस्टर विवाद?

एबीवीपी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ा छात्र संगठन है, जबकि मनसे छात्र संगठन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से जुड़ा है। दोनों संगठनों के बीच कई बार कॉलेज परिसरों में पोस्टर और विचारधारा को लेकर विवाद होता रहा है। शहर में पोस्टर विवाद ने इस बार भी टकराव का रूप ले लिया। अब पुलिस जांच के बाद ही साफ होगा कि असल में पोस्टर किसने लगाए थे। फिलहाल माहौल को शांत बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

साभार : अमर उजाला  

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।