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साउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को हरा विश्व टेस्ट कप जीता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. दक्षिण अफ्रीका अब वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का नया विजेता है. टेस्ट क्रिकेट को रोमांचक बनाने के लिए आईसीसी ने 1 अगस्त, 2019 को इस टूर्नामेंट की शुरुआत की थी. इसका पहला चक्र न्यूजीलैंड ने जीता था. फिर दूसरा चक्र ऑस्ट्रेलिया ने जीता और अब तीसरा चक्र दक्षिण अफ्रीका ने अपने नाम किया. इसके साथ ही दक्षिण अफ्रीका ने आईसीसी ट्रॉफी का सूखा खत्म किया. दक्षिण अफ्रीका ने 27 साल के बाद कोई आसीसी ट्रॉफी जीती है. यहां हम आपको खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया की हार का सबसे बड़ा कारण बताएंगे. यह गलती कंगारुओं ने फाइनल शुरू होने के एक दिन पहले ही कर दी थी, जो ऑस्ट्रेलियाई टीम की हार का मुख्य कारण बनी.

जानें ऑस्ट्रेलिया की हार का सबसे बड़ा कारण

फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने कैमरून ग्रीन को तीन नंबर पर खिलाने का फैसला किया. ग्रीन ऑलराउंडर खिलाड़ी हैं, वो तेज गेंदबाजी करते हैं, और मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करते हैं. फिर भी ऑस्ट्रेलिया ने इस अहम मैच में ग्रीन को तीन नंबर पर खिलाया. इससे पिछले लंबे वक्त से तीन नंबर पर खेलने वाले मार्नस लाबुशेन को ओपनिंग करनी पड़ी. यह दोनों ही खिलाड़ी फ्लॉप रहे. कैमरून ग्रीन पहली पारी में सिर्फ चार रन बना सके. मार्नस लाबुशेन ने पहली पारी में 17 रन बनाए. दूसरी पारी में ग्रीन खाता भी नहीं खोल सके. लाबुशेन ने दूसरी पारी में 22 रन बनाए.

अगर ऑस्ट्रेलिया सैम कोंसटास से पारी की शुरुआत कराती तो लाबुशेन तीसरे नंबर पर खेलते, जो उनकी परंपरागत पोजीशन है. ग्रीन अग्रेसिव बल्लेबाज हैं. यह कहना भी गलत नहीं होगा कि ग्रीन टेक्निकली साउंड नहीं हैं. सबसे अहम बात यहां यह है कि ग्रीन एक ऑलराउंडर खिलाड़ी हैं, लेकिन फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज के तौर पर खिलाया. उन्होंने इस मैच में गेंदबाजी नहीं की. ऑस्ट्रेलिया का यह फैसला पूरी तरह से गलत साबित हुआ.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।