मंगलवार, जून 30 2026 | 08:32:41 AM
Breaking News
Home / राष्ट्रीय / ‘मैं खुद बनना चाहता था कांग्रेस अध्यक्ष, लेकिन मेरे खिलाफ बड़ी साजिश हुई’— अशोक गहलोत का धमाका

‘मैं खुद बनना चाहता था कांग्रेस अध्यक्ष, लेकिन मेरे खिलाफ बड़ी साजिश हुई’— अशोक गहलोत का धमाका

Follow us on:

मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की गंभीर मुद्रा में तस्वीर, राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष विवाद समाचार।

जयपुर । रविवार, 7 जून 2026

राजस्थान की राजनीति से लेकर दिल्ली के 10 जनपथ तक एक बार फिर सियासी भूचाल आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में एक ऐसा दावा किया है, जिसने कांग्रेस के भीतर दबे कई पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। गहलोत ने पहली बार सार्वजनिक रूप से और बेहद स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया कि वे खुद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहते थे, लेकिन उनके खिलाफ एक गहरी साजिश रची गई।

मुख्यमंत्री पद का मोह या कोई गहरी साजिश?

अब तक देश और मीडिया के सामने यह धारणा बनी हुई थी कि साल 2022 में जब कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी, तब सोनिया गांधी और राहुल गांधी की पहली पसंद अशोक गहलोत थे। हालांकि, माना यह गया कि गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने को तैयार नहीं थे और इसी खींचतान के कारण उन्होंने खुद इस जिम्मेदारी को लेने से इनकार कर दिया था।

लेकिन, रविवार को दिए अपने बयान में गहलोत ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा:

“देशभर में यह गलत धारणा बना दी गई कि मैंने खुद अध्यक्ष पद के लिए मना किया था। यहां तक कि मेरे अपने करीबी और समर्थक भी आज तक यही मानते आ रहे हैं, जो कि पूरी तरह गलत है। कौन कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहेगा? जब सोनिया गांधी ने मुझसे कहा तो क्या मैं मना करूंगा? मैं तो खुद कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहता था, लेकिन मुझे लगता है कि मेरे साथ साजिश की गई।”

गहलोत के इस बयान से साफ है कि वे इस पूरे घटनाक्रम के लिए खुद को नहीं, बल्कि पार्टी के ही कुछ आंतरिक गुटों या पर्यवेक्षकों की भूमिका को जिम्मेदार मान रहे हैं। उनके अनुसार, जब जयपुर में पार्टी के पर्यवेक्षक भेजे गए थे, उसके बाद अचानक स्थितियां बदलीं और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

मानेसर कांड ‘हमारे घर का मामला’: पायलट गुट पर बदले तेवर

कभी सचिन पायलट को ‘नकारा-निकम्मा’ जैसे कड़े शब्दों से संबोधित करने वाले अशोक गहलोत के सुर इस बार काफी बदले हुए नजर आए। वर्ष 2020 में सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों द्वारा की गई बगावत (जिसे सियासत में ‘मानेसर कांड’ कहा जाता है) पर पूछे गए सवाल पर गहलोत ने इस बार बेहद सधा हुआ रुख अपनाया।

गहलोत ने कहा, “ये लोग बार-बार मानेसर को लेकर के ये तंज कसते हैं हमारे पर, ये हमारे घर का मामला है। वो हम निपटते जाएंगे आपस के अंदर।” उन्होंने आगे राजस्थान कांग्रेस के सभी प्रमुख धड़ों के नेताओं का नाम लेते हुए एकजुटता दिखाने की कोशिश की:

  • सचिन पायलट (पूर्व उपमुख्यमंत्री)

  • गोविंद सिंह डोटासरा (पीसीसी अध्यक्ष)

  • टीकाराम जूली (नेता प्रतिपक्ष)

  • सी.पी. जोशी और भंवर जितेंद्र सिंह

  • डॉ. चंद्रभान और डॉ. बी.डी. कल्ला (वरिष्ठ नेता)

गहलोत ने जोर देकर कहा कि वे सभी नेता आपस में बैठकर बात कर लेंगे और किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर कर लिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का यह बदला हुआ रुख आलाकमान को यह दिखाने की कोशिश है कि वे राज्य में सभी गुटों को साथ लेकर चलने की क्षमता आज भी रखते हैं।

25 सितंबर के ‘विद्रोह’ पर दी सफाई

साल 2022 में 25 सितंबर को जयपुर में बुलाई गई कांग्रेस विधायक दल की आधिकारिक बैठक का गहलोत समर्थक विधायकों ने बहिष्कार कर दिया था। आलाकमान ने इसे अनुशासनहीनता और एक तरह का विद्रोह (Revolt) माना था।

इस पर सफाई देते हुए गहलोत ने इतिहास का पन्ना पलटा। उन्होंने याद दिलाया कि 1 जनवरी 1978 को जब इंदिरा गांधी ने अपनी कांग्रेस बनाई थी, तब राजस्थान के नेता उनके साथ मजबूती से खड़े थे और जेल भी गए थे। उन्होंने कहा, “हाईकमान के खिलाफ हम कभी रिवोल्ट नहीं कर सकते। जितना विश्वास इंदिरा जी, सोनिया जी और राहुल गांधी ने राजस्थान की कांग्रेस पर किया है, वह अटूट है। आलाकमान का भरोसा हम पर पहले भी था और आज भी है।”

इस बयान के क्या हैं सियासी मायने?

राजस्थान में विधानसभा चुनाव हारने के बाद बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में अशोक गहलोत का यह बयान अचानक नहीं आया है। इसके पीछे दो मुख्य सियासी रणनीतियां दिखाई देती हैं:

  1. गांधी परिवार के प्रति वफादारी साबित करना: यह साफ करना कि वे आलाकमान के फैसले के खिलाफ नहीं थे, बल्कि किसी ‘साजिश’ के शिकार हुए थे।

  2. राजस्थान की राजनीति में प्रासंगिकता: सचिन पायलट और अन्य युवा नेताओं के उभरते दौर में यह संदेश देना कि वे अभी भी राजस्थान कांग्रेस के सबसे बड़े ‘क्राइसिस मैनेजर’ और धुरी हैं।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

मन की बात 135वीं कड़ी: आत्मनिर्भर भारत, रक्षा तकनीक और जन-भागीदारी की अनूठी मिसालें

नई दिल्ली । रविवार, 28 जून 2026  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने मासिक रेडियो …