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दुबई के शारिक साठा गैंग ने रची थी संभल दंगों की साजिश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने शारिक साठा गैंग के एक अहम सदस्य मो गुलाम को गिरफ्तार किया है. गुलाम दुबई में बैठकर हिंसा को अंजाम देने वाले शारिक साठा गैंग से जुड़ा हुआ था. पुलिस ने इस हिंसा में शारिक साठा के संबंध को उजागर किया है और कहा है कि इसकी साजिश दुबई में रची गई थी. शारिक साठा गैंग का नाम बड़े अपराधों से जुड़ा हुआ है. पुलिस के मुताबिक, शारिक साठा दाऊद इब्राहिम के गैंग से भी जुड़ा हुआ है और आईएसआई के लिए काम करता है. वह संभल के दीपा सराय का रहने वाला है, और पहले वह बस-ट्रक में हेल्पर का काम करता था. शारिक साठा कई अपराधों में शामिल रहा है, जैसे लूट, चोरी, डकैती, और गाड़ी चोरी.

कोर्ट में चार्जशीट दाखिल

शारिक साठा 2018 में जेल से छूटने के बाद फर्जी पासपोर्ट से दुबई भाग गया था. संभल हिंसा के दौरान 4 लोगों की हत्या हुई थी और कई लोग घायल हुए थे. हिंसा में शामिल 79 आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. इसमें फायरिंग, आगजनी, और पथराव के आरोप लगाए गए हैं. पुलिस ने हिंसा में इस्तेमाल किए गए विदेशी पिस्टल और कारतूस भी बरामद किए हैं. पुलिस के मुताबिक, हिंसा की साजिश शारिक साठा गैंग ने बनाई थी और इसे दुबई से निर्देशित किया गया था.

क्या बोले एसपी?

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि शारिक साठा को संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क का संरक्षण प्राप्त था. पुलिस ने इसके बाद गुलाम को गिरफ्तार किया, जो इस हिंसा में एक अहम भूमिका निभा रहा था. पुलिस ने गुलाम से विदेशी पिस्टल और कारतूस बरामद किए हैं. इसके अलावा, पुलिस ने बताया कि शारिक साठा ने वकील विष्णु शंकर जैन की हत्या की भी साजिश रची थी. पुलिस ने इस खुलासे के बाद 80 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है और हिंसा में शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है. संभल हिंसा में हुई मौतों और घायलों के बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और बड़े गैंग्स की साजिश को उजागर किया है. इस मामले में अभी और गिरफ्तारी हो सकती है.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।