लखनऊ | 1 अप्रैल, 2026
डेस्क रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के मदरसों में मिड-डे मील (MDM) योजना को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य सरकार ने 558 सहायता प्राप्त मदरसों में भोजन वितरण और बजट के इस्तेमाल में भारी अनियमितताओं की शिकायतों के बाद विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई अखिल भारतीय पसमांदा समाज मंच की ओर से दर्ज कराई गई एक औपचारिक शिकायत के बाद शुरू हुई है।
क्या है पूरा विवाद? (मुख्य आरोप)
पसमांदा समाज मंच ने मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की निदेशक मोनिका रानी को सौंपे गए शिकायती पत्र में कुछ चौंकाने वाले दावे किए हैं। शिकायत के अनुसार, कई मदरसों में कागजों पर बच्चों की संख्या (Ghost Students) बढ़ाकर दिखाई गई है ताकि सरकारी बजट और राशन हड़पा जा सके। मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
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बजट का दुरुपयोग: एमडीएम के लिए आवंटित ‘कन्वर्जन कॉस्ट’ और खाद्यान्न का निजी हितों के लिए इस्तेमाल।
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घटिया भोजन: जो बच्चे वास्तव में मौजूद हैं, उन्हें बेहद खराब गुणवत्ता और कम पोषण वाला खाना दिया जा रहा है।
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फर्जी उपस्थिति: रिकॉर्ड में लाभार्थियों की संख्या वास्तविक उपस्थिति से 2 से 3 गुना तक अधिक दिखाई गई है।
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पारदर्शिता का अभाव: स्टॉक रजिस्टर और वितरण रिकॉर्ड में भारी हेरफेर की आशंका।
जांच के दायरे में कौन-कौन?
निदेशक मोनिका रानी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जिलों के अधिकारियों को सत्यापन (Verification) के कड़े निर्देश दिए हैं। जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर फोकस रहेगा:
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मदरसों का भौतिक सत्यापन: क्या रिकॉर्ड में दर्ज बच्चे वास्तव में वहां पढ़ते हैं?
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फंड ट्रेल: सरकार द्वारा जारी की गई धनराशि किस बैंक खाते में गई और उसका उपयोग कैसे हुआ?
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मेनू का पालन: क्या बच्चों को साप्ताहिक चार्ट के अनुसार पौष्टिक भोजन मिल रहा है?
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दोषियों पर कार्रवाई: यदि भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो मदरसा संचालकों के साथ-साथ विभागीय मिलीभगत की भी जांच होगी।
बलरामपुर में 11 करोड़ का ‘एमडीएम घोटाला’ बना नजीर
हाल ही में यूपी के बलरामपुर जिले में भी मिड-डे मील में 11 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया था, जिसमें जिला समन्वयक समेत 44 लोगों पर FIR दर्ज की गई थी। उस मामले में भी फर्जी तरीके से छात्रों की संख्या बढ़ाकर बजट निकाला गया था। इसी को देखते हुए अब इन 558 मदरसों की जांच को काफी अहम माना जा रहा है।
सरकार का सख्त रुख
उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही मदरसों के सर्वे और उनके आधुनिकीकरण को लेकर सक्रिय है। इस नए आदेश से स्पष्ट है कि सरकार अब योजनाओं की ‘लीकेज’ रोकने के मूड में है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।
महत्वपूर्ण नोट: यह मामला न केवल भ्रष्टाचार से जुड़ा है, बल्कि उन गरीब और वंचित बच्चों के अधिकारों का भी है, जिनके पोषण के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
Matribhumisamachar


