तिरुवनंतपुरम । गुरुवार, 4 जून, 2026
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से समाज को झकझोर देने वाला एक बेहद निंदनीय मामला सामने आया है। यहाँ एक मदरसे के उस्ताद (शिक्षक) पर अपनी ही नाबालिग छात्राओं को ऑनलाइन क्लास के बहाने अश्लील सामग्री भेजने और उनका मानसिक व यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी शिक्षक के खिलाफ बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
ऑनलाइन क्लास के लिए बने वॉट्सऐप ग्रुप का किया दुरुपयोग
‘ऑर्गेनाइजर’ की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पहचान समीर असारी के रूप में हुई है, जो जवाहर बीमापल्ली मुस्लिम जमात कमेटी से जुड़े एक मदरसे में पढ़ाता था। कोरोना काल के बाद से ही कई शैक्षणिक संस्थानों की तरह इस मदरसे की भी कुछ कक्षाएं ऑनलाइन संचालित हो रही थीं। समीर असारी ने इन ऑनलाइन मदरसा कक्षाओं के प्रबंधन के लिए एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था, जिसमें 12 से 14 साल की नाबालिग छात्राओं को जोड़ा गया था।
आरोप है कि इस ग्रुप का उपयोग पढ़ाई के लिए करने के बजाय आरोपी उस्ताद समीर असारी इसमें अश्लील वीडियो और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने लगा। सिर्फ इतना ही नहीं, उसने छात्राओं को व्यक्तिगत तौर पर यौन शोषण के इरादे से मैसेज भी भेजे।
वीडियो भेजकर पूछता था- “क्या हम मिल सकते हैं?”
शिकायत के मुताबिक, आरोपी मौलाना इन अश्लील वीडियोज को ग्रुप और व्यक्तिगत चैट पर भेजकर मासूम बच्चियों से पूछता था कि क्या वे उससे बाहर मिल सकती हैं? वह संदेशों में वीडियो में दिखने वाली आपत्तिजनक गतिविधियों को असल जिंदगी में दोहराने का दबाव भी बनाता था।
इस घिनौनी करतूत का खुलासा तब हुआ जब कुछ पीड़ित छात्राओं के माता-पिता ने अचानक उनके फोन चेक किए और उस्ताद द्वारा भेजे गए मैसेजेस को देख लिया। इसके बाद अभिभावकों के होश उड़ गए।
जमात कमेटी ने शिकायतों को किया नजरअंदाज, फिर पुलिस ने संभाला मोर्चा
मामला सामने आने के बाद पीड़ित बच्चियों के माता-पिता ने सबसे पहले सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद में ‘जवाहर बीमापल्ली मुस्लिम जमात कमेटी’ से लिखित और मौखिक शिकायत की। आरोप है कि कमेटी ने इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले को दबाने की कोशिश की और शुरुआती दिनों में शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
कमेटी की बेरुखी और कई दिनों तक आरोपी शिक्षक के खिलाफ कोई आंतरिक कार्रवाई न होते देख, अंततः परिवारों ने कानून का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मामले की संवेदनशीलता को समझा और आरोपी समीर असारी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) कानून और अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की।
आरोपी फरार, सोशल मीडिया पर पुराना भाषण वायरल
मामला पुलिस तक पहुँचने और मुकदमा दर्ज होने की भनक लगते ही आरोपी उस्ताद समीर असारी मौके से फरार हो गया। पुलिस की विशेष टीमें फिलहाल उसकी संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही हैं और उसकी जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
इस बीच, सोशल मीडिया पर आरोपी समीर असारी का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर लोग उसकी दोहरी मानसिकता पर थू-थू कर रहे हैं। इस वायरल वीडियो में वह मंच से भाषण देते हुए बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत कर रहा है। वह कह रहा है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए मासूम बच्चों का शोषण किया जा सकता है, इसलिए माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए। लोग अब इस वीडियो को साझा कर लिख रहे हैं कि जो दूसरों को उपदेश दे रहा था, वही खुद बच्चों का शोषक निकला।
नवीनतम अपडेट
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कानूनी प्रक्रिया: पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में न केवल आईटी एक्ट (IT Act) बल्कि डिजिटल माध्यमों से बच्चों को प्रताड़ित करने की सख्त धाराओं को भी जोड़ा गया है।
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कमेटी पर उठते सवाल: स्थानीय स्तर पर अब इस बात की भी जांच की मांग उठ रही है कि जमात कमेटी ने शिकायत मिलने के बाद भी पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया, क्योंकि पॉक्सो एक्ट के तहत किसी भी बाल शोषण के मामले को छुपाना या पुलिस को न बताना भी एक कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है।
Matribhumisamachar


