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किसान आंदोलन 2026: बजट में MSP पर चुप्पी से भड़के किसान, क्या फिर होगा दिल्ली कूच?

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बजट 2026 के विरोध में हाईवे जाम करते किसान

नई दिल्ली. वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 के बाद देश के अन्नदाता एक बार फिर आंदोलन की राह पर आते नजर आ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई और कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन भी उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। इसी नाराज़गी के चलते पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों ने प्रदर्शन तेज कर दिए हैं।

🔴 किसानों के असंतोष की बड़ी वजहें

किसान संगठनों का कहना है कि बजट में डिजिटल कृषि और एग्री-टेक पर तो जोर दिया गया, लेकिन खेती से जुड़े बुनियादी संकटों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया।

1. MSP पर कानूनी गारंटी नहीं

किसानों की सबसे पुरानी मांग है कि MSP को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार C2 + 50% के फार्मूले पर कानूनी रूप से लागू किया जाए। बजट 2026 में इस पर कोई स्पष्ट घोषणा न होने से नाराज़गी और गहराई है।

2. खाद सब्सिडी और लागत का दबाव

खाद, बीज और डीज़ल जैसी कृषि लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन बजट में उर्वरक सब्सिडी में कोई बड़ी राहत नहीं दी गई। इसका सीधा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

3. कर्ज माफी पर कोई संकेत नहीं

किसान संगठनों को उम्मीद थी कि बढ़ते कृषि ऋण को देखते हुए सरकार कोई कर्ज राहत या कर्ज माफी योजना लेकर आएगी, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं दिखी।

🚜 जमीनी हालात: हाईवे पर बढ़ता तनाव

बजट के बाद किसानों ने सांकेतिक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

  • पंजाब और हरियाणा के कई इलाकों में नेशनल हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ है।
  • भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन अभी सिर्फ चेतावनी है।
  • अगर सरकार ने किसानों की मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो 13 फरवरी से ‘दिल्ली कूच’ का बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कई जगह वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की गई है।

🏛️ सरकार का पक्ष: भविष्य की खेती पर फोकस

सरकार का कहना है कि बजट 2026 में कृषि को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने की कोशिश की गई है। सरकार के अनुसार यह बजट पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने वाला है।

बजट 2026 के प्रमुख कृषि प्रस्ताव:

  • नेचुरल फार्मिंग मिशन: 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य।
  • तिलहन मिशन: खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लिए नई योजना।
  • भंडारण अवसंरचना: गांव-स्तर पर अनाज भंडारण के लिए बड़े पैमाने पर योजना का विस्तार।
  • एग्री-टेक और डिजिटल कृषि: तकनीक के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर।

हालांकि किसानों का कहना है कि ये योजनाएं भविष्य के लिए उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन वर्तमान आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को इससे तत्काल राहत नहीं मिलती।

🔎 आगे क्या?

अब सबकी निगाहें सरकार और किसान संगठनों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हैं। यदि MSP और कर्ज राहत जैसे मुद्दों पर कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला, तो दिल्ली कूच आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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