इस्लामाबाद. पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों—गिलगित और स्कार्दू—में हालात बेकाबू होने के बाद प्रशासन ने सोमवार (2 मार्च) से बुधवार (4 मार्च) तक 3 दिनों का सख्त कर्फ्यू लागू कर दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित मौत की खबरों के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने अब पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
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मृतकों की संख्या: गिलगित-बाल्टिस्तान में 14 और पूरे पाकिस्तान में अब तक 22 से अधिक लोगों की मौत।
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सैन्य हस्तक्षेप: स्थिति संभालने के लिए पाकिस्तान आर्मी (Pakistan Army) को सड़कों पर उतारा गया।
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UN मिशन पर हमला: स्कार्दू में UNMOGIP और UNDP के कार्यालयों में आगजनी।
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इंटरनेट बंद: मोबाइल सेवाओं और सोशल मीडिया पर आंशिक प्रतिबंध।
हिंसा की शुरुआत और खामेनेई की मौत की अफवाह
प्रदर्शनों की चिंगारी तब भड़की जब शिया-बहुल गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में यह खबर फैली कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के कथित हवाई हमलों में मौत हो गई है। इस खबर ने स्थानीय समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया, जिसने जल्द ही हिंसक प्रदर्शनों का रूप ले लिया।
स्कार्दू और गिलगित में भारी तबाही
स्कार्दू में स्थिति सबसे अधिक तनावपूर्ण रही, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों को निशाना बनाया। संयुक्त राष्ट्र के सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के स्थानीय दफ्तरों में तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी गई।
गिलगित में भी उपद्रवियों ने एक पुलिस स्टेशन, एक स्कूल और एक स्थानीय चैरिटी संस्था के कार्यालय को भारी नुकसान पहुँचाया है। सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में अब तक 80 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
पूरे पाकिस्तान में अलर्ट: कराची से इस्लामाबाद तक तनाव
हिंसा की आंच केवल उत्तरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही। पाकिस्तान के प्रमुख महानगरों—कराची, लाहौर और इस्लामाबाद—में भी अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों (Consulates) के बाहर भारी प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों के कारण देशभर की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
| क्षेत्र | मृतक संख्या | मुख्य घटना |
| गिलगित-बाल्टिस्तान | 12-14 | UN दफ्तरों में आगजनी, कर्फ्यू लागू |
| सिंध (कराची) | 04 | अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर झड़प |
| पंजाब (लाहौर) | 03 | सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान |
| अन्य क्षेत्र | 02+ | सुरक्षा बलों के साथ झड़पें |
प्रशासन का कड़ा रुख: ‘देखते ही गोली मारने’ के आदेश?
हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी है और लोगों को घरों के भीतर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। कर्फ्यू के दौरान किसी भी तरह की सभा पर पूर्ण प्रतिबंध है, हालांकि स्थानीय निवासियों को केवल जनाजे की नमाज के लिए बेहद सीमित और नियंत्रित छूट दी गई है।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, संवेदनशील इलाकों में सेना की टुकड़ियों ने फ्लैग मार्च शुरू कर दिया है। अफवाहों को रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है ताकि सोशल मीडिया के जरिए हिंसा न भड़के।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और कूटनीतिक चिंता
संयुक्त राष्ट्र के मिशनों पर हमले के बाद पाकिस्तान सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डाल रही है, बल्कि पश्चिम के साथ उसके कूटनीतिक संबंधों को भी जटिल बना सकती है।
अस्वीकरण: यह समाचार रिपोर्ट प्राप्त जानकारी और सूत्रों पर आधारित है। क्षेत्र में इंटरनेट पाबंदियों के कारण हताहतों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
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