नई दिल्ली । मंगलवार, 2 जून 2026
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के चलते पैदा हुए वैश्विक संकट के बीच भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) आधिकारिक तौर पर 1 जून से लागू हो गया है।
यह ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता ऐसे समय में लागू हुआ है जब लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण भारत की फर्टिलाइजर (उर्वरक) और ईंधन आपूर्ति पर भारी दबाव था। इस समझौते के लागू होने से न केवल भारत के 99 प्रतिशत से अधिक एक्सपोर्ट पर से टैरिफ (सीमा शुल्क) हट जाएगा, बल्कि संकट के इस दौर में देश के करोड़ों किसानों के लिए यूरिया और डीएपी (DAP) की किल्लत भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
ईरान युद्ध का भारतीय फर्टिलाइजर सप्लाई पर असर
खाड़ी क्षेत्र पारंपरिक रूप से भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ रहा है। भारत अपनी कुल यूरिया जरूरत का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का 50 प्रतिशत आयात इसी क्षेत्र से करता है। गौरतलब है कि LNG का इस्तेमाल यूरिया और अन्य नाइट्रोजन-बेस्ड (नाइट्रोजन युक्त) उर्वरकों को बनाने में मुख्य ईंधन के रूप में होता है।
ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जारी व्यवधानों के कारण हाल के महीनों में यह सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी। इसी संकट को भांपते हुए भारत सरकार ने अपनी रणनीतिक दूरदर्शिता का परिचय दिया और ओमान के साथ व्यापारिक एकीकरण को अंतिम रूप दिया।
संकटमोचक बनेगा ओमान: संकट में भारत को डायवर्ट करेगा अपना स्टॉक
ओमान के विदेश व्यापार सलाहकार पंकज खिमजी ने 1 जून को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि ओमान, भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त फर्टिलाइजर और पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
खिमजी के मुताबिक, यदि भारत सरकार की ओर से औपचारिक अनुरोध किया जाता है, तो ओमान ‘ओमान इंडिया फर्टिलाइज़र प्रोजेक्ट’ (OMIFCO) से होने वाले अपने उत्पादन के हिस्से को भारत की ओर मोड़ने (डायवर्ट करने) पर विचार करेगा। आपको बता दें कि यह प्रोजेक्ट भारत की प्रसिद्ध सहकारी संस्थाओं – IFFCO (इफको), KRIBHCO (कृभको) और ओमान इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी का एक बेहद सफल संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है।
आंकड़ों की जुबानी: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-ओमान व्यापार
हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े गवाही देते हैं कि ओमान भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बन चुका है:
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कुल द्विपक्षीय व्यापार: वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर $11.18 बिलियन पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष $10.61 बिलियन था।
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भारत का आयात (Import): भारत ने ओमान से कुल $7.2 बिलियन का सामान मंगाया। इसमें सर्वाधिक हिस्सेदारी कच्चा तेल ($1.6 बिलियन), LNG ($1.2 बिलियन) और फर्टिलाइजर ($843 मिलियन) की रही।
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भारत का निर्यात (Export): वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात करीब $4 अरब रहा, जिसमें रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद जैसे पेट्रोल ($78.1 करोड़) और नेफ्था ($74.6 करोड़) शीर्ष पर रहे। इसके अलावा चावल, कैल्साइंड एल्युमिना और आयरन-स्टील उत्पादों का भी बड़ा योगदान रहा।
खरीफ सीजन 2026: कम जरूरत और मजबूत बफर स्टॉक से किसान बेफिक्र
कृषि और किसान कल्याण विभाग ने 1 जून को देश के किसानों को आश्वस्त करते हुए खरीफ-2026 के लिए उर्वरकों की उपलब्धता का नया खाका पेश किया है।
1. मांग का यथार्थवादी पुनर्मूल्यांकन
अल नीनो के प्रभाव और मौसम के मिजाज को देखते हुए राज्यों से चर्चा के बाद खाद की अनुमानित जरूरत को तर्कसंगत बनाया गया है। यूरिया की कुल जरूरत को 194.02 लाख मीट्रिक टन (LMT) से घटाकर 190.32 LMT और डीएपी (DAP) की मांग को 59.17 LMT से घटाकर 56.23 LMT तय किया गया है। खरीफ 2026 के लिए कुल फर्टिलाइजर आवश्यकता 383.9 LMT आंकी गई है।
2. रिकॉर्ड तोड़ बफर स्टॉक
1 जून की स्थिति के अनुसार, देश के गोदामों में 199.86 LMT उर्वरकों का बफर स्टॉक पहले से मौजूद है। यह कुल जरूरत का 52 प्रतिशत से भी अधिक है, जबकि सामान्य तौर पर इस सीजन की शुरुआत में बफर स्टॉक महज 33 प्रतिशत के आसपास होता है।
3. होर्मुज स्ट्रेट को बायपास कर पहुंचेगा स्टॉक
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने स्पष्ट किया कि भारत ने युद्धग्रस्त होर्मुज स्ट्रेट के बजाय वैकल्पिक समुद्री मार्गों का उपयोग करते हुए सुरक्षित तरीके से 25 LMT यूरिया, 15 LMT DAP और 10 LMT NPKs (अमोनियम सल्फेट सहित) का प्रबंध कर लिया है। यह खेप जून और जुलाई के महीनों में भारतीय बंदरगाहों पर लैंड कर जाएगी। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक भारत घरेलू उत्पादन और सुरक्षित आयात के दम पर 132.43 LMT उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित कर चुका है।
भारत की ‘ग्लोबल सोर्सिंग’ रणनीति
भविष्य के खतरों से निपटने के लिए भारत ने केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहना छोड़ दिया है। भारत सरकार ने अपनी ‘सोर्सिंग डायवर्सिफिकेशन’ नीति के तहत रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र और टोगो जैसे मित्र देशों से फर्टिलाइजर के दीर्घकालिक सौदे किए हैं, ताकि घरेलू बाजार में कीमतों और उपलब्धता में कोई उतार-चढ़ाव न आए।
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