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अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: एसआईटी करेगी ट्रस्ट के 5 सालों के खातों का ऑडिट, जांच के दायरे में बड़े पदाधिकारी

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अयोध्या  गुरुवार, 2 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और आभूषणों की कथित चोरी का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा कर दिया है।

सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, एसआईटी अब ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के पिछले 5 साल के वित्तीय खातों का दोबारा सघन ऑडिट (Re-audit) करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह गड़बड़ी कब से शुरू हुई और वास्तव में यह कथित घोटाला कितना बड़ा है।

शुरुआती जांच में दान चोरी की पुष्टि, 8 आरोपी गिरफ्तार

इस मामले की शुरुआत जून 2026 के पहले सप्ताह में हुई थी जब मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था।

एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि मंदिर में आने वाली दान राशि की गणना में गंभीर विसंगतियां थीं। जांच टीम के अनुसार, नोटों और कीमती सामान की गिनती के समय स्थापित ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह उल्लंघन किया जा रहा था। इस शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नकदी गिनने और प्रबंधन से जुड़े 8 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नु यादव (जो ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर बताया जा रहा है) शामिल हैं।

दान में आए गहनों और कीमती वस्तुओं की होगी भौतिक जांच

एसआईटी अब सिर्फ कागजी खातों तक सीमित नहीं है। टीम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित किए गए सोने, चांदी के आभूषणों और अन्य कीमती सामानों की भौतिक जांच (Physical Verification) भी करेगी।

दरअसल, कई श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मंदिर परिसर में बहुमूल्य वस्तुएं दान की थीं, लेकिन उन्हें इसकी कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई। एसआईटी दान के मूल रिकॉर्ड और मंदिर के स्ट्रॉन्ग रूम में रखे वास्तविक सामान का मिलान कर इन आरोपों की सत्यता का पता लगाएगी।

महाकुंभ और निर्माण कार्यों के लेन-देन भी रडार पर

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इस सिंडिकेट ने हाल के महीनों में, विशेषकर प्रमुख धार्मिक आयोजनों (जैसे महाकुंभ) के दौरान बढ़े हुए जनसैलाब का फायदा उठाकर सबसे ज्यादा वित्तीय हेराफेरी की। सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों के घरों से हुई नकदी की बरामदगी ने इस सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर दिया है।

इसके अलावा, एसआईटी मंदिर निर्माण से जुड़े विभिन्न ठेकों और बड़े लेन-देन की भी गहराई से जांच कर रही है। ट्रस्ट के कुछ सदस्यों पर निर्माण कार्यों के दौरान कमीशन लेने के आरोप भी सामने आए हैं, जिसके चलते करोड़ों रुपये के खर्चों के एक-एक बिल को दोबारा खंगाला जा रहा है।

जांच के दायरे में आए ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी

वित्तीय गड़बड़ी की कड़ियाँ अब ट्रस्ट के शीर्ष स्तर तक पहुँचती दिख रही हैं। शुरुआती जांच में मिले दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ट्रस्ट के कई वरिष्ठ पदाधिकारी सीधे तौर पर एसआईटी की रडार पर आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में ट्रस्टी अनिल मिश्रा, गोपाल राव और महासचिव चंपत राय की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। विपक्ष और स्थानीय संतों की ओर से भी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

यूपी सरकार ने बढ़ाई एसआईटी की अवधि

मामले की संवेदनशीलता और जांच के बढ़ते दायरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया है। अब जांच टीम सभी वैज्ञानिक और वित्तीय साक्ष्यों को समेटते हुए अपनी विस्तृत रिपोर्ट 15 जुलाई 2026 को राज्य सरकार के समक्ष पेश करेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से स्पष्ट संदेश है कि आस्था के इस सबसे बड़े केंद्र में धांधली करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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