गाजियाबाद। बुधवार, 3 जून 2026
उत्तर प्रदेश में अवैध संपत्तियों और सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जों के खिलाफ योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत गाजियाबाद में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। जनपद के मसूरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत डासना के कल्लूगढ़ी गांव में करीब 25 करोड़ रुपये की सरकारी ग्राम सभा भूमि पर अवैध रूप से निर्मित किए गए मदरसे को प्रशासन ने बुधवार को पांच बुलडोजरों की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस अवैध मदरसे का नाम ‘मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम’ था। इस कार्रवाई के साथ ही मदरसा संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसके आर्थिक स्रोतों और संभावित विदेशी फंडिंग (Foreign Funding) के एंगल से जांच तेज कर दी गई है।
12 बीघा ऊसर भूमि पर था अवैध कब्जा
राजस्व अभिलेखों के मुताबिक, डासना के खसरा नंबर 1548 की यह 12 बीघा (5.2490 हेक्टेयर) जमीन सरकारी ‘ऊसर’ (बंजर) भूमि के रूप में दर्ज है। इस कीमती ग्राम सभा की भूमि पर साल 2021 में अवैध कब्जा कर 7 कमरों वाले पक्के मदरसे और एक पार्क का निर्माण कर लिया गया था।
इस मदरसे का संचालन दिल्ली निवासी फारूक द्वारा किया जा रहा था। प्रशासन द्वारा पूर्व में बेदखली की कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए नोटिस जारी किया गया था और जुर्माना भी लगाया गया था, जिसके बाद यह मदरसा कुछ समय से बंद चल रहा था, लेकिन अवैध ढांचा वहां मौजूद था। बुधवार को राजस्व न्यायालय के आदेशों का अनुपालन करते हुए इस पूरे ढांचे को ढहा दिया गया। जमीन की वर्तमान अनुमानित कीमत करीब 24 से 25 करोड़ रुपये आंकी गई है।
1.23 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना और मुकदमा दर्ज
अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है:
-
वित्तीय जुर्माना: मदरसा प्रबंधक समिति और संचालक फारूक पर ग्राम सभा की जमीन को नुकसान पहुंचाने के एवज में 1 करोड़ 23 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति (जुर्माना) राशि वसूलने का आदेश जारी हुआ है।
-
पुलिसिया कार्रवाई: हल्का लेखपाल अनुपम मिश्र की तहरीर पर मसूरी थाने में आरोपी संचालक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं।
छावनी में बदला इलाका: सुरक्षा के थे कड़े इंतजाम
अवैध निर्माण को ढहाने के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए इलाके को भारी सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था। मौके पर अपर जिलाधिकारी (भू-अध्याप्ति) सहित कई आला अधिकारी डटे रहे। सुरक्षा बल के रूप में निम्नलिखित टीमें तैनात रहीं:
-
3 प्लाटून रैपिड रिस्पांस फोर्स (RRF)
-
2 कंपनी प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC)
-
करीब 500 बाहरी जोनों से आए पुलिसकर्मी
-
300 स्थानीय पुलिस जवान और 8 थानों के प्रभारी
-
दंगा नियंत्रण (एंटी-रायट) उपकरणों से लैस विशेष सुरक्षाकर्मी
क्या है विदेशी फंडिंग का कनेक्शन?
गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार और एडिशनल सीपी राजकरण नायर ने संयुक्त रूप से बताया कि इस मदरसे के वित्तीय स्रोतों की गहनता से स्क्रूटनी की जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात की आशंका खंगाल रही हैं कि क्या इस बड़े ढांचे को खड़ा करने और संचालित करने के पीछे किसी प्रकार की अवैध विदेशी फंडिंग का हाथ था? अधिकारियों ने साफ किया है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या राष्ट्रविरोधी तत्वों से जुड़ाव सामने आता है, तो संबंधित लोगों पर रासुका (NSA) जैसी कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है।
खोड़ा के सूर्या हत्याकांड के बाद एक्शन में तेजी
गौरतलब है कि हाल ही में गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी के बाद प्रशासन पूरी तरह से रेस हो गया है। इस घटना के बाद जनपद के अवैध मदरसों और संदिग्ध धार्मिक स्थलों की जांच में अभूतपूर्व तेजी आई है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने गाजियाबाद में सरकारी जमीनों पर बने करीब 400 मदरसों और कब्रिस्तानों को चिह्नित किया है, जिन पर स्क्रूटनी चल रही है। हाल ही में उम्मीद पोर्टल पर ऐसी 323 संदिग्ध वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण भी निरस्त किया चुका है।
प्रशासन ने दो टूक शब्दों में संदेश दिया है कि सरकारी या अवैध संपत्तियों पर भूमाफियाओं के किसी भी प्रकार के कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Matribhumisamachar


