कोलकाता । बुधवार, 3 जून 2026
हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक और अभूतपूर्व भूचाल आ गया है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की शिकस्त और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद अब ममता बनर्जी की पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ी टूट की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।
विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) रथींद्र बोस ने तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को आधिकारिक तौर पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of the Opposition) के रूप में मान्यता दे दी है। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
60 विधायकों के साथ ‘शिवसेना’ जैसी बगावत की राह पर TMC
बागी गुट के प्रमुख रणनीतिकार और निष्कासित टीएमसी नेता संदीपन साहा ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बागी विधायकों के हस्ताक्षर वाली आधिकारिक चिट्ठी स्पीकर को सौंप दी गई है और विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष (LoP) के लिए तय कमरा भी ऋतब्रत बनर्जी को अलॉट कर दिया है।
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें टीएमसी के कुल 80 निर्वाचित विधायकों में से 60 विधायकों का समर्थन हासिल है।
दलबदल विरोधी कानून का गणित: भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत सदन में किसी भी दल के विभाजन को कानूनी मान्यता मिलने के लिए कम से कम दो-तिहाई (2/3) विधायकों का साथ होना जरूरी है। चूंकि इस विधानसभा चुनाव में टीएमसी के 80 विधायक जीते हैं, इसलिए कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बागी गुट को कम से कम 54 विधायकों की आवश्यकता थी। 60 विधायकों की संख्या के साथ बागी गुट ने इस तकनीकी बाधा को आसानी से पार कर लिया है।
‘ममता बनर्जी हमारी सलाहकार बनी रहें, लेकिन नाकामी के जिम्मेदार अभिषेक’
इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प पहलू बागी गुट का ममता बनर्जी के प्रति नरम और अभिषेक बनर्जी के प्रति आक्रामक रुख है। संदीपन साहा ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“हमारी दिली इच्छा है कि ममता बनर्जी हमारी सलाहकार बनी रहें और हमें अपना मार्गदर्शन देती रहें, ताकि हम नेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक (Chief Whip) के साथ मिलकर विधानसभा के अंदर पार्टी को प्रभावी ढंग से चला सकें।”
इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज पार्टी की जो दुर्गति हुई है, वह अभिषेक बनर्जी की सांगठनिक नाकामी का नतीजा है। साहा ने कहा, “जब सब कुछ अच्छा होता है तो आप उसका श्रेय लेते हैं, तो जब चीजें गलत होती हैं (चुनाव में हार) तो आपको उसकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।”
भाजपा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई रहेगी जारी: प्रसून बनर्जी
टीएमसी के एक और वरिष्ठ बागी नेता प्रसून बनर्जी ने स्पष्ट किया कि इस बगावत का मतलब भाजपा के पाले में जाना बिल्कुल नहीं है। उन्होंने वैचारिक रुख को साफ करते हुए कहा:
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मजबूत विपक्ष की भूमिका: भाजपा की नई सरकार के खिलाफ हमारा राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष बिना रुके जारी रहेगा।
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रचनात्मक सहयोग: जहां भी राज्य के विकास और जनहित की बात होगी, एक जिम्मेदार विपक्ष के रूप में हम सरकार के साथ रचनात्मक सहयोग करेंगे।
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लोकतांत्रिक सामूहिक फैसला: संसदीय लोकतंत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों का संवाद जरूरी है। अधिकांश विधायकों ने सामूहिक रूप से चार नेताओं (नेता प्रतिपक्ष और उपनेताओं) का चुनाव किया है, जो सदन में हमारा नेतृत्व करेंगे।
पश्चिम बंगाल 18वीं विधानसभा की नई स्थिति (2026)
चुनाव नतीजों और इस हालिया बगावत के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा की नई तस्वीर कुछ इस प्रकार उभर कर सामने आई है:
| पद / दल | नाम / संख्या | राजनीतिक स्थिति |
| मुख्यमंत्री (Leader of the House) | शुभेंदु अधिकारी (BJP) | भारी बहुमत के साथ सरकार का गठन |
| विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) | रथींद्र बोस (BJP) | निष्पक्ष संसदीय संचालन |
| नेता प्रतिपक्ष (LoP) | ऋतब्रत बनर्जी (TMC बागी गुट) | 60 विधायकों के समर्थन के साथ मान्यता प्राप्त |
| ममता बनर्जी गुट (TMC Official) | लगभग 20 विधायक | आधिकारिक नेतृत्व के साथ बचे हुए विधायक |
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ठीक वैसा ही है जैसा महाराष्ट्र में शिवसेना या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ हुआ था, जहां बागी गुट ने न केवल विधायी दल पर कब्जा किया, बल्कि आगे चलकर मूल पार्टी के नाम और सिंबल पर भी दावा ठोक दिया।
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