मस्कट. पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण तनाव अब एक आत्मघाती मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान द्वारा ओमान की खाड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कई तेल टैंकरों पर किए गए हमलों ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इन हमलों ने न केवल वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को भी एक बड़े संकट की ओर धकेल दिया है।
🚀 ड्रोन बोट और ‘कामीकाजे’ हमलों से दहली खाड़ी
ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, समुद्र में अब पारंपरिक युद्ध के बजाय आधुनिक समुद्री युद्ध तकनीक (Modern Naval Warfare) का खौफनाक चेहरा देखने को मिल रहा है।
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विस्फोटक ड्रोन बोट का हमला: ओमान के तट के पास एक विशाल तेल टैंकर को ‘कामीकाजे’ (आत्मघाती) ड्रोन बोट से निशाना बनाया गया। यह छोटी नौका अत्यधिक विस्फोटकों से लदी थी, जो सीधे जहाज के इंजन रूम से टकराई।
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भारतीय नाविक की मौत: इस भीषण धमाके और उसके बाद लगी आग में एक भारतीय नाविक की मौत की पुष्टि हुई है। कई अन्य क्रू सदस्य गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज मस्कट के अस्पतालों में चल रहा है।
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पर्यावरण को खतरा: टैंकर पर हजारों टन कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद लदे थे। धमाके के बाद समुद्र में तेल रिसाव (Oil Spill) शुरू हो गया है, जिससे क्षेत्र के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
भारतीय क्रू पर निशाना: 15 भारतीय सुरक्षित निकाले गए
एक अन्य घटना में, मुसंदम तट के पास एक और टैंकर को निशाना बनाया गया। इस जहाज पर 20 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें से 15 भारतीय नागरिक थे।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: हमले के तुरंत बाद भारतीय नौसेना और ओमान के कोस्ट गार्ड सक्रिय हुए। हालांकि 4 नाविक घायल हुए हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि सभी 15 भारतीयों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।
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भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ी चिंता व्यक्त की है और खाड़ी क्षेत्र में अपने युद्धपोतों की गश्त (Patrolling) बढ़ा दी है।
⚓ होर्मुज जलडमरूमध्य: क्यों है यह दुनिया की ‘जीवन रेखा’?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ है।
| मुख्य तथ्य | विवरण |
| तेल व्यापार | दुनिया का लगभग 20-25% कच्चा तेल यहीं से गुजरता है। |
| LNG सप्लाई | कतर जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की गैस आपूर्ति इसी मार्ग पर टिकी है। |
| रणनीतिक स्थिति | इसके एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ ओमान व यूएई स्थित हैं। |
वर्तमान स्थिति: हमलों के डर से शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग को ‘नो-गो ज़ोन’ घोषित करना शुरू कर दिया है। सैकड़ों कार्गो जहाज और टैंकर बीच समुद्र में लंगर डाले खड़े हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन टूटने की कगार पर है।
💰 वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रहार: तेल की कीमतों में ‘आग’
इन हमलों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दिखना शुरू हो गया है:
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कच्चे तेल में उछाल: ब्रेंट क्रूड की कीमतों में रातों-रात 4-6% की तेजी देखी गई है। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि तनाव जारी रहा तो कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
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महंगा बीमा (War Risk Insurance): समुद्री बीमा कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए प्रीमियम को 10 गुना तक बढ़ा दिया है।
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शिपिंग रूट में बदलाव: कंपनियां अब होर्मुज के बजाय लंबा और खर्चीला रास्ता (अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर) अपनाने पर विचार कर रही हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80% आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
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महंगाई की मार: यदि तेल आयात की लागत बढ़ती है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं।
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लॉजिस्टिक्स लागत: समुद्री व्यापार में देरी से अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।
🛡️ निष्कर्ष और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हस्तक्षेप नहीं किया और ईरान के इन हमलों को नहीं रोका गया, तो यह संकट एक वैश्विक मंदी (Global Recession) का कारण बन सकता है। अमेरिका और सहयोगी देशों की नौसेनाएं क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं, लेकिन तनाव फिलहाल कम होता नहीं दिख रहा।
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