काठमांडू. नेपाल के राजनीतिक भविष्य को तय करने वाले आम चुनावों के नतीजे अब धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगे हैं। कल (5 मार्च) हुए मतदान के बाद आज सुबह से शुरू हुई मतगणना के रुझानों ने हिमालयी राष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। जहाँ पारंपरिक दिग्गज अपनी जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं नए चेहरों ने मुख्यधारा की पार्टियों को कड़ी चुनौती दी है।
📊 अब तक के प्रमुख रुझान और पार्टीवार स्थिति
नेपाल निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मतगणना की दौड़ में कोई भी एक दल स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ता नहीं दिख रहा है।
1. CPN-UML (केपी शर्मा ओली)
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) वर्तमान में कई पहाड़ी और ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है। पार्टी ने राष्ट्रवाद और विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ा था, जिसका असर उनके कोर वोट बैंक में साफ दिख रहा है।
2. नेपाली कांग्रेस (शेर बहादुर देउबा/गगन थापा)
नेपाल की सबसे पुरानी लोकतांत्रिक पार्टी, नेपाली कांग्रेस, तराई के इलाकों और कुछ प्रमुख शहरी केंद्रों में आगे चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार युवाओं के बीच लोकप्रिय नेता गगन थापा के प्रभाव के कारण पार्टी को युवा वोट मिलने की उम्मीद है।
3. राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) – ‘उदयमान शक्ति’
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) का प्रदर्शन रहा है। काठमांडू घाटी, पोखरा और चितवन जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में इस नए दल ने पारंपरिक पार्टियों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। भ्रष्टाचार विरोधी रुख और पारदर्शी शासन के वादे ने शहरी मतदाताओं को काफी प्रभावित किया है।
4. माओवादी केंद्र (पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’)
निवर्तमान प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’ की पार्टी, CPN (माओवादी केंद्र), कुछ सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही है। हालांकि, पिछली बार की तुलना में इनके प्रदर्शन में गिरावट की संभावना जताई जा रही है, फिर भी सरकार गठन में ‘किंगमेकर’ की भूमिका के लिए यह दल काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
🏗️ सरकार गठन का गणित: क्या फिर बनेगी गठबंधन सरकार?
नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) में कुल 275 सीटें हैं, जिनमें से 165 प्रत्यक्ष चुनाव (FPTP) और 110 आनुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) प्रणाली से चुनी जाती हैं। बहुमत के लिए 138 सीटों की आवश्यकता होती है।
मौजूदा रुझानों को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
-
किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत मिलना कठिन है।
-
गठबंधन की राजनीति: सरकार बनाने के लिए एक बार फिर छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन अनिवार्य होगा।
-
अस्थिरता की चुनौती: नेपाल में पिछले कुछ दशकों से सरकारों का बार-बार बदलना एक बड़ी चुनौती रही है, और जनता इस बार एक स्थिर सरकार की उम्मीद कर रही है।
🗳️ मतदान और निर्वाचन आयोग की तैयारी
निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता के अनुसार, “मतगणना प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर अधिकांश सीटों के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।”
इस बार मतदान प्रतिशत लगभग 60-62% रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को दर्शाता है। विशेष रूप से महिला मतदाताओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं की लंबी कतारें देखी गईं।
💡 आगे की राह
नेपाल के लिए यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि आर्थिक संकट से उबरने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों (विशेषकर भारत और चीन के साथ) को संतुलित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। क्या केपी शर्मा ओली फिर से वापसी करेंगे, या गगन थापा जैसा कोई नया नेतृत्व सामने आएगा? यह आने वाले कुछ घंटों में तय हो जाएगा।
ताजा अपडेट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।
Matribhumisamachar


