कोलकाता | गुरुवार, 7 मई 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय ‘खेला’ खत्म होने के बजाय एक नए मोड़ पर आता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत और 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के किले के ढहने के बाद अब पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं लग रहा है।
बैठक में क्या हुआ?
बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई थी। इस बैठक का उद्देश्य चुनाव परिणामों का विश्लेषण करना और भविष्य की रणनीति तय करना था। हालांकि, चर्चा रणनीति से ज्यादा अनुपस्थित विधायकों पर सिमट गई। टीएमसी के कुल 80 नवनिर्वाचित विधायकों में से केवल 70 ही बैठक में पहुंचे, जबकि 10 विधायक नदारद रहे।
गायब विधायकों पर सफाई और अटकलें
पार्टी के भीतर से आ रही खबरों ने दलबदल की अटकलों को हवा दे दी है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या ये विधायक पाला बदलने की तैयारी में हैं? हालांकि, टीएमसी ने इन खबरों पर तुरंत स्पष्टीकरण जारी किया है:
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क्षेत्रीय जिम्मेदारी: कुछ विधायकों को चुनाव बाद की हिंसा को देखते हुए अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए रुकने को कहा गया था (जैसे बीरभूम में काजल शेख)।
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मेडिकल इमरजेंसी: सागरदिघी के विधायक सहित कुछ अन्य सदस्यों ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है।
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उत्तर बंगाल का संकट: उत्तर बंगाल के कुछ विधायकों को लंबी दूरी और स्थानीय स्थितियों के कारण न आने की छूट दी गई थी।
ममता बनर्जी का आक्रामक रुख
हार के बावजूद ममता बनर्जी ने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। उन्होंने इस चुनाव परिणाम को “जनादेश की लूट” करार दिया है। ममता बनर्जी का कहना है कि काउंटिंग के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और वह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह वर्तमान में इस्तीफा नहीं देंगी और विपक्ष की आवाज को मजबूत करेंगी।
निष्कर्ष
बंगाल की राजनीति इस समय एक चौराहे पर खड़ी है। जहाँ एक तरफ भाजपा सरकार बनाने की तैयारी में है, वहीं टीएमसी अपने कुनबे को एकजुट रखने की चुनौती से जूझ रही है। ये 10 विधायक सचमुच निजी कारणों से गायब थे या यह किसी बड़े राजनीतिक तूफान की आहट है, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
Matribhumisamachar


