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ममता सरकार बनाम कुमार विश्वास: कोलकाता में तीन बार रद्द हुई ‘राम कथा’, जानें क्या है पूरा सच

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कोलकाता में डॉ. कुमार विश्वास की राम कथा के पोस्टर और रद्द किए गए ऑडिटोरियम की सांकेतिक तस्वीर।

कोलकाता | बुधवार, 6 मई 2026  

हाल ही में सोशल मीडिया पर डॉ. कुमार विश्वास का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में अपनी ‘राम कथा’ के आयोजनों को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. विश्वास के अनुसार, उनके कार्यक्रमों को एक या दो बार नहीं, बल्कि लगातार तीन बार प्रशासनिक स्तर पर बाधित किया गया।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

डॉ. विश्वास ने अपनी एक कथा के दौरान बताया कि कोलकाता के प्रसिद्ध धोनो धान्य ऑडिटोरियम में ‘राम कथा’ के लिए छह महीने पहले ही बुकिंग सुनिश्चित कर ली गई थी। आयोजन से चार महीने पहले ही श्रद्धालुओं के टिकट बुक हो चुके थे और व्यापक स्तर पर प्रचार शुरू हो गया था।

लेकिन, ऐन वक्त पर प्रशासन ने “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देते हुए बुकिंग रद्द कर दी। इसके बाद:

  1. आयोजकों ने दूसरा ऑडिटोरियम बुक किया, जिसे भी निरस्त कर दिया गया।

  2. अंततः एक आयोजक ने अपने निजी विशाल बैंक्वेट हॉल में कार्यक्रम करने का निर्णय लिया।

  3. पुलिस प्रशासन से अनुमति मिलने के मात्र दो घंटे बाद, इस निजी स्थान की अनुमति भी वापस ले ली गई।

डीजीपी से बातचीत और कुमार विश्वास का रुख

डॉ. विश्वास ने बताया कि उन्होंने इस मामले पर सीधे राज्य के डीजीपी पीयूष पांडेय से संपर्क किया। विश्वास के अनुसार, डीजीपी ने अपनी विवशता जाहिर करते हुए कहा, “मैं एक नौकरशाह हूँ, इसलिए कुछ बोल नहीं सकता, लेकिन मैं भी आपकी राम कथा सुनता हूँ।”

जब डॉ. विश्वास को कोर्ट जाने की सलाह दी गई, तो उन्होंने आध्यात्मिक लहजे में जवाब दिया कि “उनका कोर्ट एक ही है (ईश्वर)”। हालांकि, उन्होंने आयोजकों को 9 मई के लिए फिर से ऑडिटोरियम बुक करने का निर्देश देकर एक नया सस्पेंस पैदा कर दिया है।

रद्द हुए प्रमुख कार्यक्रम

विवाद केवल राम कथा तक सीमित नहीं था। 1 और 2 मार्च को कुमार विश्वास को कोलकाता में तीन बड़े मंचों पर होना था:

  • महाराजा अग्रसेन धाम का सांस्कृतिक कार्यक्रम।

  • इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) का विशेष सत्र।

  • एक अन्य सामाजिक संस्था का सम्मेलन।

प्रशासनिक दबाव के चलते ये सभी कार्यक्रम अचानक निरस्त कर दिए गए, जिससे स्थानीय समर्थकों और आयोजकों में भारी रोष देखा गया।

संभावित सुधार और वर्तमान स्थिति

सोशल मीडिया पर कुछ दावों में इसे केवल ‘तकनीकी खामी’ बताया गया था, लेकिन डॉ. विश्वास के सीधे आरोपों ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया है। वर्तमान में, 9 मई के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर बंगाल की राजनीति और डॉ. विश्वास के प्रशंसकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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