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RBI की ‘स्वर्ण वापसी’: विदेशी तिजोरियों से भारत लौट रहा है अपना खजाना

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नई दिल्ली | शुक्रवार, 8 मई 2026

भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। 1991 का वह दौर जब भारत को अपना सोना हवाई जहाज से लंदन और स्विट्जरलैंड भेजना पड़ा था, अब बीती बात हो गई है। आज भारत न केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, बल्कि अपनी संपत्तियों पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने की दिशा में भी अग्रसर है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक RBI के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना है। इसमें से अब करीब 680 टन (लगभग 77%) भारत की अपनी सीमाओं के भीतर सुरक्षित रखा गया है।

क्यों जरूरी है सोने की ‘घर वापसी’?

RBI के इस कदम के पीछे चार प्रमुख रणनीतिक स्तंभ हैं:

  1. भू-राजनीतिक सुरक्षा (Geopolitical Security):

    हाल के वर्षों में वैश्विक राजनीति में अस्थिरता बढ़ी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों द्वारा विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने के बाद, भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है। देश के भीतर रखा सोना किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध या कूटनीतिक दबाव से मुक्त रहता है।

  2. भंडारण लागत में कटौती:

    विदेशों (जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड) में सोना रखने के लिए भारी ‘कस्टडी फीस’ और बीमा खर्च देना पड़ता है। इस भंडार को घरेलू वॉल्ट्स (विशेषकर मुंबई और नागपुर) में स्थानांतरित करने से RBI के परिचालन खर्चों में कमी आएगी।

  3. वित्तीय संप्रभुता और बाजार का भरोसा:

    जब देश का बहुमूल्य भंडार अपनी धरती पर होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और आम जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजता है। यह भारत की मजबूत होती आर्थिक स्थिति का प्रतीक है।

  4. लॉजिस्टिक सुगमता:

    जरूरत पड़ने पर देश के भीतर मौजूद सोने का प्रबंधन और उपयोग करना बहुत आसान होता है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में ‘रिस्पांस टाइम’ कम हो जाता है।

कहाँ रखा जाता है यह खजाना?

भारत लौटने वाला यह सोना मुख्य रूप से मुंबई स्थित RBI के मुख्यालय और नागपुर में स्थित सुरक्षित वॉल्ट्स में रखा जा रहा है। ये स्थान उच्चतम स्तर की सुरक्षा और निगरानी प्रणालियों से लैस हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

अक्सर चर्चाओं में कहा जाता है कि भारत ने अपना पूरा सोना वापस मंगा लिया है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार:

  • अभी भी लगभग 197.67 मीट्रिक टन सोना विदेशों में (BoE और BIS) जमा है।

  • यह पूरी तरह से सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निपटान (International Settlements) की सुविधा के लिए भी रखा जाता है।

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