वॉशिंगटन | शुक्रवार, 8 मई 2026
न्यूयॉर्क स्थित कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (CIT) ने एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक टैरिफ को “अमान्य” और “अनाधिकृत” घोषित कर दिया है। तीन जजों के पैनल ने 2-1 के बहुमत से यह निर्णय सुनाया।
क्या था पूरा मामला?
फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत लगाए गए भारी टैरिफ को असंवैधानिक बताया था। इसके तुरंत बाद, ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का उपयोग करते हुए 10% का एक ‘अस्थायी’ टैरिफ लागू कर दिया। प्रशासन का तर्क था कि अमेरिका का बढ़ता व्यापार घाटा एक आर्थिक संकट है।
कोर्ट ने क्यों दी दखल?
अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘व्यापार घाटा’ (Trade Deficit) और ‘भुगतान संतुलन संकट’ (Balance of Payments Crisis) दो अलग चीजें हैं। जजों ने कहा कि धारा 122 का उद्देश्य 1970 के दशक की मौद्रिक व्यवस्था के दौरान सोने के भंडार को बचाने के लिए था, न कि आज के व्यापारिक असंतुलन को सुधारने के लिए।
अदालत की टिप्पणी: “यदि राष्ट्रपति को इस तरह टैरिफ लगाने की असीमित छूट दी गई, तो यह कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के अधिकारों का उल्लंघन होगा।”
फैसले का तात्कालिक प्रभाव
अदालत का यह आदेश फिलहाल सभी के लिए लागू नहीं है। इसका सीधा लाभ निम्नलिखित को मिला है:
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वॉशिंगटन राज्य: सरकार को यहाँ से टैरिफ वसूलने पर रोक लगानी होगी।
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Burlap & Barrel: मसालों का आयात करने वाली निजी कंपनी।
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Basic Fun!: खिलौना निर्माता कंपनी, जिसके CEO ने इस जीत को छोटे व्यवसायों की बड़ी हिम्मत बताया है।
इन आयातकों को अब तक भुगतान किए गए टैरिफ का रिफंड मिलने की भी संभावना है।
अब आगे क्या?
इस फैसले के बाद व्यापार जगत में कई संभावनाएं जन्म ले रही हैं:
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न्याय विभाग की अपील: ट्रंप प्रशासन इस फैसले को ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स’ में चुनौती दे सकता है।
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सेक्शन 301 की जांच: प्रशासन अब ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ की नई जांच शुरू कर सकता है ताकि टैरिफ को दूसरे कानूनी रास्ते से वापस लाया जा सके।
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अन्य कंपनियों के मुकदमे: इस जीत के बाद सैकड़ों अन्य अमेरिकी आयातक भी रिफंड और टैरिफ से छूट के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
मुख्य तथ्य
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भ्रम: क्या सभी देशों के लिए टैरिफ खत्म हो गए?
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तथ्य: नहीं, कोर्ट ने फिलहाल केवल 3 वादियों (Plaintiffs) को राहत दी है। बाकी आयातकों को अभी भी 24 जुलाई तक (टैरिफ की समाप्ति तिथि) भुगतान करना पड़ सकता है, जब तक कि कोर्ट इसे पूरे देश के लिए लागू न कर दे।
Matribhumisamachar


