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कोरबा की ऐतिहासिक धरोहर: सीतामढ़ी की गुफाओं से मिलीं 15वीं सदी की दुर्लभ पांडुलिपियां

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

रायपुर | गुरुवार, 7 मई 2026

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। सीतामढ़ी स्थित श्रीराम गुफा मंदिर से 14 अत्यंत दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने इस खोज को न केवल संरक्षित किया है, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखित (Digital Preservation) भी कर दिया है।

पांडुलिपियों का रहस्य: ताड़पत्र और ‘मुंडिया’ लिपि

अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि ये पांडुलिपियां 15वीं से 19वीं शताब्दी के बीच की हैं। इनके बारे में कुछ विशेष तथ्य इस प्रकार हैं:

  • भाषा एवं लिपि: ये पांडुलिपियां ओड़िया भाषा में लिखी गई हैं।

  • लेखन शैली: इसमें ‘मुंडिया’ लिपि के गोलाकार अक्षरों का उपयोग किया गया है। इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन काल में ताड़पत्रों (Palm Leaves) पर लिखते समय सीधे अक्षरों से पत्ते फटने का डर रहता था, इसलिए गोलाकार अक्षरों का विकास हुआ।

  • हस्तांतरण: मंदिर के पुजारी श्री दुकालू श्रीवास ने बताया कि यह अनमोल धरोहर उनके पिता मातादीन श्रीवास और उनके पूर्वजों द्वारा पीढ़ियों से सहेजकर रखी गई थी।

डिजिटल संरक्षण और भविष्य का रोडमैप

जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह और उनकी युवा टीम (ज्ञानभारतम दूत) ने इन पांडुलिपियों का उच्च-गुणवत्तापूर्ण दस्तावेजीकरण किया है। इन्हें ‘ज्ञानभारतम ऐप’ पर अपलोड किया गया है ताकि दुनिया भर के शोधकर्ता और आने वाली पीढ़ियां छत्तीसगढ़ के इस गौरवशाली इतिहास का अध्ययन कर सकें।

अभियान का मुख्य उद्देश्य देशभर में बिखरी ऐसी दुर्लभ कड़ियों की पहचान करना और उन्हें सुरक्षित संवहन (Safe Transmission) के लिए तैयार करना है।

नोट: यद्यपि यह ओड़िया लिपि में है, छत्तीसगढ़ का कोरबा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से विभिन्न संस्कृतियों का संगम रहा है। इन पांडुलिपियों का विषय मुख्य रूप से रामायण, स्थानीय महात्म्य या धार्मिक अनुष्ठान हो सकता है, जिसकी विस्तृत व्याख्या आगामी शोध रिपोर्ट में स्पष्ट होगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।