जबलपुर । शनिवार, 20 जून 2026
देश के शिक्षा जगत से एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बदलाव की खबर आ रही है। यदि आप मध्य प्रदेश (MP) या छत्तीसगढ़ (CG) के किसी सरकारी या सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र हैं, तो भविष्य में मिलने वाली आपकी कॉलेज की डिग्री और मार्कशीट का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। इन राज्यों के कई बड़े विश्वविद्यालयों ने अपने आधिकारिक दस्तावेजों से औपनिवेशिक विरासत के प्रतीक ‘India’ शब्द को हटाने का फैसला किया है। अब हिंदी हो या अंग्रेजी, हर जगह देश के मूल नाम ‘Bharat’ का डंका बजेगा।
इस बड़े फैसले को जमीन पर उतारने की शुरुआत मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी (RDU) से होने जा रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में ऐतिहासिक शुरुआत
इस रविवार यानी 21 जून 2026 को रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी का 36वां दीक्षांत समारोह (36th Convocation Ceremony) आयोजित हो रहा है। इस समारोह में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हो रही हैं। यह पल जबलपुर और इस संस्थान के लिए इसलिए भी स्वर्णिम है क्योंकि लगभग दो दशकों (साल 2006 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के आगमन) के बाद कोई वर्तमान राष्ट्राध्यक्ष इस परिसर में आ रहा है।
इस दीक्षांत समारोह में जितने भी छात्र-छात्राओं को डिग्रियां और गोल्ड मेडल सौंपे जाएंगे, उन सभी पर ‘India’ की जगह स्पष्ट अक्षरों में ‘Bharat’ दर्ज होगा।
सिर्फ डिग्री ही नहीं, साइनबोर्ड और इनविटेशन कार्ड भी होंगे ‘भारतमय’
रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर (कुलपति) प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा ने इस नीतिगत बदलाव पर खुलकर बात की है। यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (कार्यपरिषद) ने इस संबंध में बकायदा एक प्रस्ताव पारित किया है।
इस प्रस्ताव के तहत बदलाव का दायरा केवल डिग्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे व्यापक रूप से लागू किया जाएगा:
-
विश्वविद्यालय की सभी मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट।
-
कॉलेज के तमाम ऑफिशियल डाक्यूमेंट्स और प्रशासनिक पत्राचार (Correspondence)।
-
दीक्षांत समारोह और अन्य कार्यक्रमों के निमंत्रण पत्र (Invitation Cards)।
-
यूनिवर्सिटी कैंपस और विभागों के बाहर लगे सभी आधिकारिक साइनबोर्ड्स।
कुलपति प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा का तर्क: “हम सब भारत के लोग हैं और हमारे देश का असली, प्राचीन और सनातन नाम भारत ही है। ‘India’ नाम तो बहुत बाद में विदेशियों द्वारा दिया गया। जब देश में आयोजित जी-20 (G-20) समिट के दौरान वैश्विक मंच पर ‘Bharat’ शब्द का इस्तेमाल शान से किया जा सकता है, तो देश के भीतर शिक्षा के मंदिरों में ऐसा करने से संकोच क्यों?”
प्रयागराज ज्ञान महाकुंभ (2025) में मिली थी सराहना
इस ऐतिहासिक कदम की रूपरेखा पहले से तैयार की जा रही थी। कुलपति ने बताया कि साल 2025 में प्रयागराज महाकुंभ के दौरान आयोजित हुए ‘ज्ञान महाकुंभ’ में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के इस प्रस्ताव को काफी सराहा गया था और इसके लिए यूनिवर्सिटी को सम्मानित भी किया गया था। इस अभियान के पीछे ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ जैसी संस्थाओं का लंबा वैचारिक प्रयास रहा है, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली से औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) के अवशेषों को हटाने के लिए प्रयासरत हैं।
कतार में हैं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कई यूनिवर्सिटीज
यह भाषाई और सांस्कृतिक बदलाव सिर्फ जबलपुर तक सीमित नहीं रहने वाला है। मध्य प्रदेश की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (इंदौर) सहित छत्तीसगढ़ की सेंट्रल यूनिवर्सिटी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (बिलासपुर) जैसी कई अन्य स्टेट और सेंट्रल यूनिवर्सिटीज ने भी इस राह पर चलने का मन बना लिया है। आने वाले सत्रों में इन दोनों राज्यों के लाखों स्टूडेंट्स को मिलने वाले शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह से ‘भारतमय’ स्वरूप में दिखाई देंगे।
संवैधानिक स्थिति और छात्रों के बीच चर्चा
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 (Article 1) कहता है— “India, that is Bharat, shall be a Union of States” (इंडिया, अर्थात भारत, राज्यों का एक संघ होगा)। साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि नागरिक या संस्थान अपनी इच्छानुसार ‘इंडिया’ या ‘भारत’ किसी भी नाम का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं।
शिक्षा जगत के इस फैसले को लेकर छात्रों और शिक्षाविदों के बीच सकारात्मक उत्साह देखा जा रहा है। इसे देश की सांस्कृतिक पहचान और गौरव को पुनर्जीवित करने वाले एक साहसिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कुछ छात्रों के मन में यह जिज्ञासा भी है कि विदेशों में उच्च शिक्षा या नौकरियों के लिए दस्तावेज सत्यापन (Degree Verification) के समय अंग्रेजी प्रारूप में भी ‘Bharat’ लिखे होने पर क्या प्रक्रियाएं समान रहेंगी, जिस पर प्रशासन का कहना है कि यह पूरी तरह वैध और तकनीकी रूप से सुदृढ़ व्यवस्था है।
Matribhumisamachar


