लखनऊ. देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के छात्र न केवल तकनीक और नवाचार में अपना लोहा मनवा रहे हैं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता की भी एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। छात्रों द्वारा शुरू किया गया ‘पंचामृत’ (Panchamrut) अभियान आज उन सैकड़ों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन गया है, जिन्हें पोषण की सख्त जरूरत है। यह वाकई में एक हृदयस्पर्शी और प्रेरणादायक खबर है। आईआईटी कानपुर के छात्रों ने यह सिद्ध कर दिया है कि समाज सेवा के लिए बड़ी धनराशि से ज्यादा बड़े विजन और नेक इरादों की जरूरत होती है।
छोटा योगदान, बड़ा बदलाव
इस अभियान की सबसे खास बात इसकी सादगी और पहुंच है। इस पहल के तहत छात्र अपनी पॉकेट मनी से हर महीने मात्र 20 रुपये का योगदान देते हैं। सुनने में यह राशि भले ही बहुत छोटी लगे, लेकिन जब हजारों छात्रों का यह व्यक्तिगत योगदान सामूहिक रूप में मिलता है, तो वह एक बड़े सामाजिक बदलाव का आधार बन जाता है।
पोषण और स्वास्थ्य पर केंद्रित ‘पंचामृत’
इस अभियान का नाम ‘पंचामृत’ इसकी कार्यप्रणाली को दर्शाता है:
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सप्ताह में 5 दिन भोजन: वर्तमान में लगभग 230 जरूरतमंद बच्चों को सप्ताह में पांच दिन ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
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सर्वांगीण विकास: यह भोजन न केवल बच्चों की भूख मिटाता है, बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है।
तकनीकी शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी
आईआईटी जैसे संस्थान में पढ़ाई का दबाव अक्सर छात्रों को व्यस्त रखता है, लेकिन इसके बावजूद छात्रों ने जिस तरह से इस अभियान को प्रबंधित किया है, वह काबिले तारीफ है। यह पहल छात्रों के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी, सहानुभूति और सामुदायिक सेवा की भावना को पुख्ता करती है। यह दर्शाता है कि भविष्य के इंजीनियर केवल मशीनों के विशेषज्ञ नहीं, बल्कि संवेदनशील नागरिक भी बन रहे हैं।
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