नई दिल्ली. पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच भारत सरकार ने राज्यसभा में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदन को संबोधित करते हुए बताया कि भारत न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
मुख्य अपडेट्स: एक नज़र में
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ईरानी जहाज को मानवीय मदद: ईरान के विशेष अनुरोध पर भारत ने हिंद महासागर में फंसे एक ईरानी जहाज को सुरक्षित शरण दी है।
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1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को केंद्र सरकार ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
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आर्मेनिया बना वैकल्पिक रास्ता: तनावग्रस्त क्षेत्रों से भारतीयों को निकालने के लिए सरकार आर्मेनिया के रास्ते का उपयोग कर रही है।
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तेहरान में हाई-अलर्ट: ईरान की राजधानी तेहरान में भारतीय दूतावास 24/7 सक्रिय है और छात्रों व व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।
कूटनीति और मानवीय सहायता का संतुलन
विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि उन्होंने हाल ही में ईरानी नेतृत्व से संवाद किया था। ईरान की ओर से हिंद महासागर में मौजूद अपने जहाजों के लिए मदद मांगी गई थी, जिसे भारत ने स्वीकार करते हुए सुरक्षित स्थान प्रदान किया। इसके लिए ईरान ने भारत सरकार का औपचारिक आभार भी व्यक्त किया है।
“भारत इस पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता का पक्षधर है। हमारा मानना है कि युद्ध किसी समस्या का अंत नहीं है, समाधान केवल बातचीत और कूटनीति (Dialogue and Diplomacy) से ही संभव है।” — एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
सरकार की भविष्य की योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठकों में नियमित रूप से हालात की समीक्षा की जा रही है। सरकार ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर भारतीयों को सुरक्षित रहने और आवश्यकता पड़ने पर स्वदेश लौटने की सलाह दी है।
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