गुरुवार, मई 14 2026 | 01:17:44 AM
Breaking News
Home / अपराध / एनआईए अदालत का कड़ा संदेश: राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में जेल सामान्य, जमानत अपवाद

एनआईए अदालत का कड़ा संदेश: राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में जेल सामान्य, जमानत अपवाद

Follow us on:

एनआईए कोर्ट जम्मू द्वारा आतंकी मददगार शाहीन अहमद लोन की जमानत याचिका खारिज किए जाने की सांकेतिक तस्वीर

जम्मू | रविवार, 10 मई 2026  

जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठनों हिजबुल मुजाहिदीन (HM) और लश्कर-ए-ताइबा (LeT) को रसद और हथियार पहुंचाने के आरोपी शाहीन अहमद लोन की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। यह मामला न केवल सीमा पार से हथियारों की तस्करी से जुड़ा है, बल्कि इसमें निलंबित डीएसपी देवेंद्र सिंह के साथ आतंकियों की गिरफ्तारी का हाई-प्रोफाइल कनेक्शन भी शामिल है।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी: सुरक्षा सर्वोपरि

विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने फैसला सुनाते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकी गतिविधियों से जुड़े गंभीर मामलों में “जमानत नियम है और जेल अपवाद” वाला सामान्य सिद्धांत लागू नहीं होता। अदालत के अनुसार, जहां देश की संप्रभुता और सुरक्षा दांव पर हो, वहां कठोर कानूनों के प्रावधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

मामले का घटनाक्रम और गंभीर आरोप

यह मामला 11 जनवरी, 2020 का है, जब श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर एक कार की तलाशी के दौरान आतंकी गठजोड़ का खुलासा हुआ था।

  • बरामदगी: कार से एक AK-47 राइफल, तीन पिस्तौल और हैंड ग्रेनेड बरामद हुए थे।

  • मुख्य पात्र: कार में हिजबुल आतंकी सैयद नवीद मुश्ताक और रफी अहमद राथर के साथ तत्कालीन पुलिस अधिकारी देवेंद्र सिंह और इरफान शफी मीर सवार थे।

  • शाहीन लोन की भूमिका: एनआईए की जांच के अनुसार, बारामुला निवासी शाहीन लोन ने हिजबुल कमांडर सद्दाम पाडर से 20 लाख रुपये लेकर लश्कर के आतंकियों को हथियारों की खेप पहुंचाई थी। उस पर पाकिस्तान से हथियार मंगवाने और आतंकी नेटवर्क को सक्रिय रखने का गंभीर आरोप है।

नवीनतम तथ्य (Updates)

हालिया घटनाक्रमों और कानूनी दस्तावेजों के आधार पर इस मामले में कुछ स्पष्टताएं आवश्यक हैं:

  1. संपत्तियों की कुर्की: ताजा जानकारी के अनुसार, एनआईए ने शाहीन लोन की बारामुला स्थित अचल संपत्तियों को यूएपीए की धारा 33(1) के तहत कुर्क (Attach) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  2. कानूनी स्थिति: आरोपी पक्ष का तर्क था कि वह 2020 से जेल में है और मुकदमे की गति धीमी है। हालांकि, अदालत ने रिकॉर्ड को देखते हुए कहा कि गवाहों की जांच नियमित रूप से हो रही है और 164 गवाहों की सूची में से महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए जा रहे हैं।

निष्कर्ष

अदालत ने स्पष्ट किया कि यूएपीए की धारा 43D(5) के तहत यदि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया (Prima Facie) आरोप सही प्रतीत होते हैं, तो उसे जमानत नहीं दी जा सकती। शाहीन लोन के मामले में मौखिक और दस्तावेजी सबूत उसकी संलिप्तता की पुष्टि करते हैं।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

एसएसपी अजय गणपति उधम सिंह नगर का चित्र।

उधम सिंह नगर में धर्मांतरण के खिलाफ पुलिस का बड़ा एक्शन: तीन FIR दर्ज, SIT करेगी जांच

देहरादून । मंगलवार, 12 मई 2026 उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में धर्मांतरण की …