नई दिल्ली. आज पूरा देश भारत के दूसरे प्रधानमंत्री और सादगी की प्रतिमूर्ति लाल बहादुर शास्त्री की 60वीं पुण्यतिथि पर उन्हें नमन कर रहा है। इस विशेष अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली स्थित उनके स्मारक ‘विजय घाट’ पर सुबह से ही गणमान्य व्यक्तियों का तांता लगा रहा।
गृह मंत्री अमित शाह ने अर्पित की पुष्पांजलि
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज सुबह विजय घाट पहुंचकर शास्त्री जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शास्त्री जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव को याद किया। शाह के साथ कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने भी स्मारक पर मत्था टेका और शास्त्री जी के आदर्शों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया।
‘जय जवान, जय किसान’ के नारे की गूँज
श्रद्धांजलि सभा के दौरान नेताओं ने शास्त्री जी के ऐतिहासिक नारे ‘जय जवान, जय किसान’ को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि यह नारा आज भी देश की सुरक्षा करने वाले सैनिकों और अन्नदाताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का सबसे बड़ा प्रतीक है। देश की सुरक्षा और खाद्य आत्मनिर्भरता की नींव रखने में शास्त्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व की जमकर सराहना की गई।
इतिहास के झरोखे से: ताशकंद समझौता और 1965 का युद्ध
लाल बहादुर शास्त्री का निधन 11 जनवरी 1966 को तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद में हुआ था। वह भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शांति समझौते के लिए वहां गए थे।
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साहसिक नेतृत्व: उनके कार्यकाल के दौरान, भारत ने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
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सादगी और ईमानदारी: उन्हें उनकी ईमानदारी, विनम्रता और कठिन समय में दृढ़ निर्णय लेने की क्षमता के लिए सदैव याद किया जाता है।
शास्त्री जी का जीवन आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी देशवासी ‘सादगी के प्रतीक’ को याद करते हुए उन्हें नमन कर रहे हैं।
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