कोलकाता | सोमवार, 11 मई 2026
पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को अपनी पहली कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रियों के विभागों का औपचारिक रूप से बंटवारा कर दिया है। ‘परिवर्तन’ के संकल्प के साथ सत्ता में आई भाजपा सरकार ने अपनी पहली ही बैठक में न केवल प्रशासनिक ढांचे को स्पष्ट किया, बल्कि चुनावी घोषणापत्र के सबसे बड़े वादों—सीमा सुरक्षा और स्वास्थ्य—पर तत्काल मुहर लगा दी है।
सुवेंदु कैबिनेट: किसे मिला कौन सा विभाग?
कैबिनेट में अनुभवी नेताओं और युवा चेहरों का मिश्रण देखने को मिला है। विभागों का आवंटन इस प्रकार है:
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दिलीप घोष: पंचायत व ग्रामीण विकास और कृषि विपणन विभाग। (ग्रामीण बंगाल पर पकड़ मजबूत करने की जिम्मेदारी)।
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अग्निमित्रा पाल: नगर विकास और नारी व शिशु कल्याण विभाग।
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निशिथ प्रामाणिक: उत्तर बंगाल विकास विभाग के साथ खेल व युवा कल्याण विभाग।
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अशोक कीर्तनिया: खाद्य विभाग।
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खुधीराम टुडू: आदिवासी विकास विभाग।
ऐतिहासिक फैसले: सीमा सुरक्षा और आयुष्मान भारत
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई कड़े और दूरगामी फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य “जीरो घुसपैठ” है।
1. BSF को 45 दिनों में मिलेगी जमीन:
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ (Fencing) लगाने के लिए लंबित जमीन विवाद को खत्म करते हुए, कैबिनेट ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को आवश्यक जमीन हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा, “अगले 45 दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी ताकि सीमा को पूरी तरह सील किया जा सके।”
2. केंद्रीय योजनाओं का शंखनाद:
ममता बनर्जी सरकार के दौरान राज्य में रुकी हुई केंद्रीय योजनाओं को अब हरी झंडी दे दी गई है। राज्य में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना, पीएम विश्वकर्मा और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया गया है।
3. कानूनी और प्रशासनिक बदलाव:
सरकार ने केंद्र के नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता आदि) को राज्य में तुरंत प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। साथ ही, स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती के लिए उम्मीदवारों की आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट देने का भी प्रस्ताव पारित किया गया है।
भविष्य की राह
यह पहली बैठक साफ संकेत देती है कि सुवेंदु सरकार केंद्र के साथ समन्वय (Double Engine) बिठाकर राज्य की कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव लाने की तैयारी में है। विशेष रूप से उत्तर बंगाल और आदिवासी क्षेत्रों के लिए अलग मंत्रियों की नियुक्ति क्षेत्रीय असंतुलन को पाटने की कोशिश मानी जा रही है।
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