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भारत-बांग्लादेश सीमा गतिरोध: 68 पॉइंट्स पर बाड़ लगाने और निर्माण कार्यों को लेकर ढाका ने जताया कड़ा विरोध

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भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी कंटीली बाड़ और सुरक्षा बल द्वारा की जा रही पेट्रोलिंग का दृश्य, जो दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन को दर्शाता है।

ढाका । गुरुवार, 11 जून 2026

भारत और बांग्लादेश के बीच के मधुर कूटनीतिक संबंधों में सीमा प्रबंधन (Border Management) को लेकर एक नई हलचल देखी जा रही है। बांग्लादेश सरकार ने दोनों देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत द्वारा किए जा रहे कंटीले तारों की बाड़ (Fencing) लगाने और अन्य बुनियादी ढांचागत (Infrastructure) विकास कार्यों पर औपचारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

ढाका का आरोप है कि भारतीय अधिकारियों ने सीमा पर कुल 68 महत्वपूर्ण बिंदुओं (Points) पर मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन किया है। इस विरोध के बाद सीमा पर आगे होने वाले कई प्रोजेक्ट्स पर फिलहाल असमंजस की स्थिति बन गई है।

क्या है पूरा मामला और बांग्लादेश की आपत्ति?

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission) को एक कूटनीतिक संदेश (Diplomatic Note) भेजा है। इस संदेश में मुख्य रूप से आरोप लगाया गया है कि भारतीय सुरक्षा और निर्माण एजेंसियों ने बांग्लादेश की पूर्व सहमति लिए बिना “नो-मैन लैंड” के 150 गज (Yards) के दायरे में कई तरह की गतिविधियां की हैं।

बांग्लादेश ने इन उल्लंघनों को श्रेणियों में बांटकर विस्तृत डेटा साझा किया है, जिसके अनुसार कुल 68 जगहों पर नियमों की अनदेखी की गई:

  • कांटेदार तार की बाड़ लगाने के प्रयास: 39 मामले

  • सड़कों का निर्माण और मरम्मत: 33 मामले

  • सीमा चौकियां (Border Outposts) व ढांचे: 27 मामले

  • पुल, पुलिया और तटबंध का निर्माण: 20 मामले

  • अन्य बुनियादी ढांचागत गतिविधियां: 18 मामले

महत्वपूर्ण तथ्य: बांग्लादेश ने दोटूक कहा है कि जब तक इन 68 स्थानों पर पाई गई “अनियमितताओं” का समाधान दोनों देश मिलकर नहीं निकाल लेते, तब तक आगे अन्य 86 चिन्हित जगहों पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने का काम शुरू नहीं किया जा सकता।

तथ्यात्मक विश्लेषण: 1975 के नियम क्या कहते हैं?

इस विवाद को सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए 1975 के संयुक्त दिशानिर्देशों (Joint Guidelines for Border Authorities 1975) को समझना ज़रूरी है।

  • भ्रम: अक्सर आम चर्चाओं में लोग इसे सीमा पर पूर्ण प्रतिबंध मान लेते हैं।

  • तथ्य: 1975 के समझौते के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा के 150 गज के भीतर किसी भी प्रकार का ‘पक्का या रक्षात्मक’ (Defensive/Permanent) ढांचा बिना दूसरी तरफ की सहमति के नहीं बनाया जा सकता। हालांकि, भारत का तर्क रहा है कि काँटेदार बाड़ या सड़कों का रखरखाव ‘रक्षात्मक’ या आक्रामक निर्माण नहीं, बल्कि घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए बुनियादी सुरक्षा प्रबंध हैं।

यह कूटनीतिक तनातनी ऐसे समय में खुलकर सामने आई है जब नई दिल्ली में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच महानिदेशक (DG) स्तर की द्विपक्षीय वार्ता चल रही है।

प्रवासियों की वापसी और मानवाधिकार का एंगल

इस विवाद में केवल कंटीले तार ही नहीं, बल्कि इंसानी पहलू भी शामिल है। बांग्लादेश ने भारत द्वारा बिना वैध दस्तावेजों के सीमा पार करने वाले नागरिकों को वापस भेजने (Push-back) की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताया है।

वहीं, भारतीय पक्ष का स्टैंड हमेशा से स्पष्ट रहा है कि भारत सरकार अपने घरेलू कानूनों (Domestic Laws) और स्थापित कानूनी व संप्रभु प्रक्रियाओं के तहत ही अवैध प्रवासियों की पहचान और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करती है।

आगे की राह

भारत और बांग्लादेश के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि चालू BSF-BGB कमांडर स्तर की बैठक और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से इस गतिरोध को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा। भारत के लिए सीमा की सुरक्षा सर्वोपरि है, तो वहीं बांग्लादेश के लिए अपनी संप्रभुता और तय नियमों का पालन। दोनों देशों के बीच की यह साझा सीमा (जो कि दुनिया की पांचवीं सबसे लंबी जमीनी सीमा है) आपसी सहयोग से ही सुरक्षित रह सकती है।

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