शनिवार, जुलाई 11 2026 | 06:28:00 PM
Breaking News
Home / राष्ट्रीय / पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान के बीच भूपेश बघेल की एंट्री: क्या सुलझ पाएगी चन्नी और राजा वड़िंग की रार?

पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान के बीच भूपेश बघेल की एंट्री: क्या सुलझ पाएगी चन्नी और राजा वड़िंग की रार?

Follow us on:

चंडीगढ़ । शनिवार, 11 जुलाई 2026

पंजाब कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही गुटबाजी और खींचतान के बीच एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव और पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल ने आखिरकार शनिवार को चंडीगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक गुट के साथ एक बेहद अहम बैठक की। यह बैठक सीनियर कांग्रेस नेता और विधायक राणा गुरजीत के सेक्टर 4 स्थित निवास पर करीब सवा दो घंटे तक चली।

इस बैठक के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या पंजाब कांग्रेस में पिछले कई दिनों से चल रही अंदरूनी कलह अब शांत हो जाएगी? आइए विस्तार से समझते हैं कि इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में क्या हुआ और इसके क्या सियासी मायने हैं।

हाईकमान के सख्त रुख के आगे झुका चन्नी गुट

पिछले पाँच दिनों से भूपेश बघेल चंडीगढ़ में डेरा डाले हुए हैं और पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं से मुलाकात कर रहे थे। शुरुआत में चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक गुट ने इस प्रक्रिया से दूरी बना रखी थी। चन्नी गुट की मुख्य नाराजगी अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष (PPCC Chief) बनाए जाने को लेकर है। वे इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।

हालाँकि, कांग्रेस हाईकमान ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि राजा वड़िंग ही पंजाब कांग्रेस के कप्तान बने रहेंगे। हाईकमान के इसी कड़े और स्पष्ट रुख के बाद चन्नी और उनके समर्थक नेता शनिवार को प्रभारी भूपेश बघेल से मिलने के लिए राजी हुए।

सवा दो घंटे की बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

राणा गुरजीत के घर पर हुई इस बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी के अलावा नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी मौजूद थे। बैठक बेहद गंभीर माहौल में हुई, जहाँ चन्नी गुट ने अपनी चिंताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को प्रभारी के सामने रखा।

भूपेश बघेल ने दिया ‘जीतने वाले उम्मीदवार’ को टिकट का भरोसा

बैठक खत्म होने के बाद मीडिया से बात करते हुए भूपेश बघेल ने कहा:

“राणा गुरजीत एक सीनियर नेता हैं, उन्होंने हमें बुलाया था। मैंने सभी साथियों से बात की है। उन्होंने अपनी राय मेरे सामने रखी है। कांग्रेस हाईकमान के फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है और सभी नेतृत्व के साथ हैं।”

बघेल ने नेताओं को आश्वस्त करते हुए यह भी कहा कि किसी भी नेता या कार्यकर्ता का नुकसान सिर्फ इसलिए नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि उन्हें किसी बड़े नेता का वरदहस्त (सपोर्ट) प्राप्त नहीं है। उन्होंने साफ किया कि आगामी चुनावों में टिकट केवल ‘जीतने की काबिलियत’ (Winnability) के आधार पर ही तय किया जाएगा।

चन्नी का रहस्यमयी बयान: “तेल देखो, तेल की धार देखो”

बैठक में जाने से पहले जब पत्रकारों ने चरणजीत सिंह चन्नी से पूछा कि क्या उन्हें राजा वड़िंग का नेतृत्व स्वीकार है, तो उन्होंने खुलकर जवाब देने से परहेज किया। चन्नी ने एक बेहद सधे और रहस्यमयी अंदाज में कहा, “पहले चर्चा कर लेने दीजिए… बाकी तेल देखेंगे, तेल की धार देखेंगे (इंतजार करो और देखो)।” हालाँकि, उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर यह जरूर लिखा कि वे पंजाब के हित और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं को मजबूती से प्रभारी के सामने रखने के लिए एकजुट हैं।

राजा वड़िंग की अनुपस्थिति पर क्या बोले नेता?

दिलचस्प बात यह रही कि इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग खुद मौजूद नहीं थे। जब उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाया गया, तो वड़िंग ने बेहद सहजता से कहा कि महासचिव प्रभारी का काम सभी नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मिलना होता है। यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि हर एक बैठक में प्रदेश अध्यक्ष मौजूद रहे ही।

वहीं दूसरी ओर, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने संकेत दिए कि पार्टी को कभी-कभी जमीनी हकीकतों को देखते हुए अपने फैसले बदलने पड़ते हैं। रंधावा ने कहा, “हम पंजाब में कांग्रेस की मजबूत सरकार चाहते हैं। इसके लिए हमें ऐसे नेताओं की जरूरत है जो बिना किसी समझौते के, बेबाकी और मजबूती से जनता के मुद्दों को उठा सकें।”

निष्कर्ष: क्या खत्म होगी अंतर्कलह?

इस सवा दो घंटे चली मैराथन बैठक के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस में फिलहाल के लिए बर्फ पिघलती नजर आ रही है। चन्नी गुट का बातचीत की मेज पर आना और भूपेश बघेल द्वारा सभी के हितों की रक्षा का भरोसा देना, पार्टी में एक सकारात्मक संदेश लेकर गया है। अब देखना यह होगा कि क्या यह ‘एकजुटता’ जमीनी स्तर पर भी दिखाई देती है या राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर खींचतान का अगला अध्याय अभी बाकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. पंजाब कांग्रेस में विवाद की मुख्य वजह क्या है?

उत्तर: विवाद की मुख्य वजह चरणजीत सिंह चन्नी गुट द्वारा अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले का विरोध और इस पर पुनर्विचार की मांग है।

Q2. चंडीगढ़ में हुई इस बैठक की मध्यस्थता किसने की?

उत्तर: इस बैठक की मध्यस्थता AICC के पंजाब मामलों के प्रभारी और जनरल सेक्रेटरी भूपेश बघेल ने की। यह बैठक कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत के निवास पर हुई।

Q3. बैठक के बाद भूपेश बघेल ने टिकट बंटवारे को लेकर क्या स्पष्ट किया?

उत्तर: भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि टिकट किसी गुटबाजी या बड़े नेता के प्रभाव से नहीं, बल्कि केवल उम्मीदवार की जीतने की काबिलियत और योग्यता के आधार पर दिया जाएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख उपलब्ध राजनीतिक समाचारों और बयानों के विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों तक सूचना पहुंचाना है। किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम की ताज़ा स्थिति के लिए आधिकारिक पार्टी बयानों को ही अंतिम माना जाए।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT जांच में बड़ा खुलासा, शेयर बाजार निवेश से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची बात

अयोध्या | शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 अयोध्या के ऐतिहासिक और भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में …