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भारत-अमेरिका व्यापार विवाद: USTR के 12.5% अतिरिक्त टैरिफ प्रस्ताव पर भारत का कड़ा रुख

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नई दिल्ली । शनिवार, 11 जुलाई 2026

हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में एक नया तनाव देखने को मिला है। भारत ने अमेरिका से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों का समाधान किसी भी एकतरफा फैसले के बजाय आपसी बातचीत और द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Bilateral Trade Talks) के जरिए किया जाना चाहिए।

यह प्रतिक्रिया अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा भारतीय उत्पादों पर प्रस्तावित 12.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ (Additional Tariff) के बाद आई है। भारत ने USTR से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की पुरजोर अपील की है।

क्या है USTR की सेक्शन 301 जांच और टैरिफ का मामला?

USTR ने 11 और 12 मार्च 2026 को ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत दो अलग-अलग जांच शुरू की थीं। यह जांच मुख्य रूप से दुनिया भर के देशों में ‘जबरन मजदूरी’ (Forced Labor) और ‘अत्यधिक औद्योगिक क्षमता’ से जुड़े मुद्दों को लेकर की गई थी, जिसमें कुल 60 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया था।

3 जून 2026 को जारी अपनी अंतिम रिपोर्ट में USTR ने कई देशों से आने वाले आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव के तहत:

  • 10% अतिरिक्त टैरिफ: कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मैक्सिको और पाकिस्तान पर।

  • 12.5% अतिरिक्त टैरिफ: भारत और चीन सहित 54 अन्य देशों से आने वाले उत्पादों पर।

भारत का USTR की रिपोर्ट पर कड़ा विरोध

8 जुलाई 2026 को इस मामले में आयोजित एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने भारत का पक्ष रखा। उन्होंने USTR की रिपोर्ट और भारत के खिलाफ निकाले गए निष्कर्षों पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत के मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:

  1. कानूनी मानकों की अनदेखी: USTR ने ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301(d) के तहत जरूरी कानूनी मानकों को पूरा नहीं किया है। केवल यह कह देना कि किसी देश में जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर पूर्ण रोक नहीं है, इसे अनुचित व्यापार व्यवहार का पर्याप्त सबूत नहीं माना जा सकता।

  2. ठोस सबूतों का अभाव: USTR की रिपोर्ट कुछ चुनिंदा देशों के उदाहरणों और व्यापक आंकड़ों पर आधारित है। किसी खास भारतीय उद्योग या उत्पाद के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।

  3. एक ही श्रेणी में रखना गलत: रिपोर्ट में 46 अलग-अलग परिस्थितियों और आर्थिक ढांचे वाली अर्थव्यवस्थाओं को एक ही कैटिगरी में रख दिया गया है, जो तार्किक नहीं है।

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह जबरन मजदूरी को खत्म करने को अपनी कानूनी और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी मानता है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरा सम्मान करता है।

चावल के आयात-निर्यात पर स्थिति स्पष्ट

वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव श्रेयांस गुप्ता ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की ओर से USTR की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। USTR का आरोप था कि भारत में जबरन मजदूरी से उत्पादित चावल का आयात किया जाता है, जिससे अमेरिकी चावल उत्पादकों को नुकसान होता है।

इस पर श्रेयांस गुप्ता ने साफ किया कि:

  • भारत में चावल का आयात बहुत ही सीमित मात्रा में होता है (केवल कुछ विशेष किस्मों की मांग पूरी करने के लिए)।

  • अमेरिका से आयात होने वाले चावल की कुल कीमत, अमेरिका को निर्यात होने वाले भारतीय चावल के मुकाबले 3 प्रतिशत से भी कम है।

  • भारत में सख्त नियम लागू हैं। अमेरिका को चावल निर्यात करने की अनुमति केवल उन्हीं मिलों और प्रोसेसिंग यूनिट्स को दी जाती है जो भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के साथ पंजीकृत होती हैं।

भारतीय उद्योग जगत (FICCI और CII) ने भी उठाई आवाज

भारतीय उद्योग संगठनों ने भी इस टैरिफ प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया है:

  • FICCI (फिक्की): संगठन का कहना है कि इस अतिरिक्त टैरिफ से न केवल भारतीय निर्यातकों पर असर पड़ेगा, बल्कि अमेरिकी निर्माता कंपनियों, आयातकों, खुदरा विक्रेताओं और अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इससे उन कंपनियों की लागत बढ़ेगी जो पहले से ही सभी मानकों का पालन कर रही हैं।

  • CII (भारतीय उद्योग परिसंघ): सीआईआई ने कहा कि 12.5% का यह प्रस्तावित टैरिफ उपलब्ध सबूतों से समर्थित नहीं है और इससे वह मकसद भी पूरा नहीं होगा जिसके लिए इसे लाया जा रहा है। USTR यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है कि भारत की नीतियां अमेरिकी व्यापार पर कोई अनुचित बोझ डाल रही हैं।

आगे का रास्ता

भारत ने USTR से रचनात्मक बातचीत और परामर्श की इच्छा जताई है। भारत का मानना है कि दोनों देशों के बीच मजबूत और ऐतिहासिक सप्लाई चेन को देखते हुए अमेरिका को इस एकतरफा टैरिफ प्रस्ताव पर दोबारा विचार करना चाहिए और इस विवाद को द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के ढांचे के भीतर सुलझाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: USTR की सेक्शन 301 जांच क्या है?

Ans: यह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा ट्रेड एक्ट के तहत की जाने वाली एक जांच है, जिसके जरिए यह देखा जाता है कि क्या किसी दूसरे देश की नीतियां या व्यवहार अमेरिकी वाणिज्य (Trade) को नुकसान पहुंचा रहे हैं या उन पर अनुचित बोझ डाल रहे हैं।

Q2: अमेरिका ने भारत पर कितने प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है?

Ans: अमेरिका ने भारत, चीन और 54 अन्य देशों से आने वाले उत्पादों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है।

Q3: भारत से अमेरिका को चावल निर्यात करने के क्या नियम हैं?

Ans: भारत से अमेरिका को चावल निर्यात करने की अनुमति केवल उन्हीं मिलों और प्रोसेसिंग यूनिट्स को दी जाती है जो भारत के कृषि मंत्रालय के साथ पंजीकृत (Registered) होती हैं, ताकि नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो सके।

Alt Image Text: भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के दौरान द्विपक्षीय बैठक करते दोनों देशों के प्रतिनिधि।

Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख उपलब्ध व्यापारिक रिपोर्टों और सार्वजनिक सुनवाई के दौरान दिए गए बयानों पर आधारित है। व्यापारिक नीतियों और शुल्कों (Tariffs) से जुड़ी आधिकारिक और अद्यतन जानकारी के लिए कृपया संबंधित सरकारी मंत्रालयों की वेबसाइट देखें।

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